July 30, 2026

दुर्ग जेल में शिक्षा का कमाल, 100 से अधिक बंदियों ने पास की परीक्षा, आजीवन कैदी ने 12वीं में हासिल की सफलता

रायपुर। छत्तीसगढ़ के केन्द्रीय जेल दुर्ग में शिक्षा के माध्यम से सुधार और पुनर्वास की एक प्रेरणादायी कहानी सामने आई है। यहां बंदियों ने न केवल शिक्षा प्राप्त की, बल्कि परीक्षा में सफलता हासिल कर अपने जीवन को नई दिशा दी है। इस शैक्षणिक सत्र में कुल 103 बंदियों ने विभिन्न परीक्षाओं में सफलता प्राप्त की है।

जेल में बंद आजीवन कारावास की सजा काट रहे भिलाई सुपेला निवासी विमल की कहानी विशेष रूप से प्रेरणादायक रही। वर्ष 2018 से धारा 302 के तहत सजा काट रहे विमल जेल आने के समय अशिक्षित थे, लेकिन उन्होंने शिक्षा को जीवन बदलने का माध्यम बनाया।

जेल में पहली कक्षा से 12वीं तक की पढ़ाई, प्रथम श्रेणी में सफलता

रायपुर। जिला विधिक सेवा प्राधिकरण और जेल प्रशासन के सहयोग से विमल ने जेल के भीतर संचालित पाठशाला में पढ़ाई शुरू की। उन्होंने कक्षा पहली से शुरुआत कर कठिन परिस्थितियों के बावजूद कक्षा 12वीं तक की शिक्षा पूरी की।

अपनी मेहनत के दम पर उन्होंने 12वीं की परीक्षा प्रथम श्रेणी में उत्तीर्ण की और अंग्रेजी विषय में डिस्टिंक्शन भी प्राप्त किया। उनकी यह उपलब्धि जेल में शिक्षा के प्रति बढ़ती जागरूकता का उदाहरण है।

103 बंदियों ने दिखाई सफलता, शिक्षा बना बदलाव का माध्यम

रायपुर। केन्द्रीय जेल दुर्ग में संचालित शैक्षणिक कार्यक्रमों के तहत कक्षा पहली से लेकर एमए अंतिम वर्ष तक की परीक्षाओं में महिला और पुरुष बंदियों ने भाग लिया। इनमें से 103 बंदियों ने सफलता प्राप्त की।

जेल प्रशासन, जेल अधीक्षक, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण और शिक्षकों के संयुक्त प्रयासों से यह उपलब्धि संभव हुई है। यह पहल बंदियों के पुनर्वास और समाज की मुख्यधारा से जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है।

समाज की मुख्यधारा में लौटने की उम्मीद

रायपुर। सफल बंदी विमल ने भविष्य में शिक्षक बनने और बच्चों को शिक्षा के प्रति प्रेरित करने का संकल्प लिया है। उनकी कहानी यह संदेश देती है कि शिक्षा और सकारात्मक सोच से व्यक्ति अपने जीवन को बदल सकता है।

जेल प्रशासन के अनुसार यह प्रयास सुधारात्मक न्याय व्यवस्था की दिशा में एक सकारात्मक उदाहरण है, जो यह साबित करता है कि हर व्यक्ति को सुधार और नई शुरुआत का अवसर मिलना चाहिए।