दुर्ग। हेमचंद यादव विश्वविद्यालय की कार्यपरिषद ने कुलसचिव भूपेंद्र कुमार कुलदीप के वित्तीय अधिकार वापस लेने का बड़ा फैसला लिया है। आगामी आदेश तक विश्वविद्यालय के भुगतान संबंधी दस्तावेजों और बैंकिंग लेन-देन में वित्त अधिकारी के साथ अधिष्ठाता छात्र कल्याण डॉ. नीलू श्रीवास्तव को द्वितीय अधिकृत हस्ताक्षरकर्ता बनाया गया है। अब कुलसचिव के हस्ताक्षर से कोई वित्तीय लेन-देन नहीं किया जाएगा।
विश्वविद्यालय ने इस संबंध में आयुक्त, उच्च शिक्षा संचालनालय को पत्र भेजकर मार्गदर्शन मांगा है। पत्र के साथ कुलसचिव के खिलाफ दर्ज FIR की प्रति भी भेजी गई है। विश्वविद्यालय ने पत्र में कहा है कि कुलसचिव वित्तीय देयकों, नस्तियों और अन्य दस्तावेजों पर हस्ताक्षर कर रहे थे, जबकि जांच और जमानत की स्थिति को देखते हुए वित्तीय कार्यों में उनकी भूमिका को लेकर नियमों का हवाला दिया गया है।
एफआईआर के बाद वित्तीय अधिकारों पर उठे सवाल
विश्वविद्यालय के अनुसार, कुलसचिव के खिलाफ विश्वविद्यालय निधि में कथित अनियमितता से संबंधित मामला जांच में है। ऐसे में भुगतान, बैंकिंग, वेतन वितरण, क्रय और वित्तीय अभिलेखों की जिम्मेदारी उन्हीं के पास रहना संस्थागत दृष्टि से उचित नहीं माना गया। अभिलेखों से छेड़छाड़ की आशंका भी पत्र में जताई गई है।
बैठक में गरमाया मामला, सदस्यों ने दी लिखित सहमति
हाल ही में हुई कार्यपरिषद की बैठक में कुलसचिव के खिलाफ दर्ज FIR के बाद उनके वित्तीय अधिकारों को लेकर चर्चा हुई। बैठक के दौरान कुलपति ने कुलसचिव से कहा कि मामला कार्यपरिषद के समक्ष है और हितधारक होने के कारण निष्पक्ष चर्चा के लिए उन्हें इस कंडिका की चर्चा से अलग रहना उचित होगा।
इस पर कुलसचिव ने कहा कि यदि कार्यपरिषद के सभी सदस्य सहमत होंगे, तभी वे बाहर जाएंगे। इसके बाद सदस्यों ने लिखित सहमति देकर हस्ताक्षर किए। कुलसचिव को चर्चा से अलग कर डॉ. नीलू श्रीवास्तव को प्रभारी सचिव बनाया गया और आगे की कार्यवाही की गई।
अब अधिष्ठाता छात्र कल्याण संभालेंगी वित्तीय कामकाज
विश्वविद्यालय में सामान्य तौर पर वित्तीय कार्यों में कुलसचिव और वित्त अधिकारी प्रक्रिया पूरी करते हैं। अब यह जिम्मेदारी डॉ. नीलू श्रीवास्तव को दी गई है। वे वित्त अधिकारी के साथ मिलकर विश्वविद्यालय के बैंकिंग और भुगतान संबंधी कार्यों को संभालेंगी।
डॉ. श्रीवास्तव शासकीय दिग्विजय महाविद्यालय में प्राध्यापक हैं और शासन की प्रतिनियुक्ति पर विश्वविद्यालय में अधिष्ठाता छात्र कल्याण के पद पर कार्यरत हैं।
कार्यपरिषद ने बताई फैसले की वजह
कार्यपरिषद के संकल्प में कहा गया है कि कुलसचिव के खिलाफ FIR दर्ज होने के बाद विश्वविद्यालय के वित्तीय हित, प्रशासनिक निष्पक्षता और कामकाज की निरंतरता को ध्यान में रखते हुए यह व्यवस्था की गई है।
यह निर्णय छत्तीसगढ़ विश्वविद्यालय अधिनियम, 1973 की धारा 24 के संबंधित प्रावधानों, धारा 24-क तथा विश्वविद्यालय में लागू परिनियमों, अध्यादेशों, विनियमों और वित्तीय नियमों के तहत प्राप्त शक्तियों के आधार पर लिया गया है।
पिछले तीन वर्षों के वित्तीय लेन-देन के ऑडिट की मांग
मामले के बीच विश्वविद्यालय के पिछले तीन वर्षों के वित्तीय लेन-देन का ऑडिट कराने की मांग भी सामने आई है। वित्तीय अभिलेख, बैंक दस्तावेज, कैशबुक और क्रय संबंधी नस्तियों को सुरक्षित रखने की मांग की गई है।
इसके अलावा सत्र 2024-25 की परीक्षाओं से जुड़े एक बाहरी फर्म को स्वीकृत करीब 92.10 लाख रुपये के भुगतान समेत अन्य खर्चों की स्वतंत्र जांच की मांग भी की गई है। कुलाधिपति से विश्वविद्यालय के प्रशासनिक और वित्तीय कामकाज की जांच कराने का अनुरोध किया गया है।





