July 29, 2026

दुर्ग में भूजल सर्वे अभियान शुरू : जलदूत एप से होगी कुओं और बोरवेल के जलस्तर की जांच

दुर्ग। भीषण गर्मी और लगातार गिरते भूजल स्तर को देखते हुए दुर्ग जिले में गांवों के कुओं और बोरवेल की जल स्थिति का वैज्ञानिक सर्वे किया जाएगा। ग्रामीण विकास मंत्रालय के निर्देशानुसार जिले की सभी ग्राम पंचायतों में 25 मई से 15 जून तक “जलदूत” मोबाइल एप के माध्यम से विशेष प्री-मानसून भूजल सर्वे अभियान चलाया जाएगा।

अभियान के तहत चयनित खुले कुओं और बोरवेल में उपलब्ध पानी की गहराई मापकर उसका डिजिटल डेटा ऑनलाइन एप में दर्ज किया जाएगा। जिला प्रशासन ने तकनीकी अमले को निर्देश दिए हैं कि ग्राम पंचायतों में जलदूत एप के जरिए बोरवेल के वाटर लेवल की जांच सुनिश्चित की जाए।

प्रशासन के अनुसार जलस्तर मापन की प्रक्रिया पूरी तरह वैज्ञानिक तरीके से की जाएगी, ताकि ग्रामीण क्षेत्रों में भूजल की वास्तविक स्थिति का सटीक आंकलन हो सके। अभियान का मुख्य उद्देश्य ग्रामीण इलाकों में भूजल उपलब्धता, जलस्तर में गिरावट और संभावित जल संकट की स्थिति का अध्ययन करना है।

जलदूत एप के माध्यम से एकत्र आंकड़ों के आधार पर भविष्य में जल संरक्षण संरचनाओं की योजना तैयार करने, वर्षा जल संचयन कार्यों की प्राथमिकता तय करने और जल संकट वाले क्षेत्रों की पहचान करने में मदद मिलेगी।

अभियान के तहत वर्ष में दो बार डेटा संग्रह किया जाएगा। पहली बार प्री-मानसून अवधि में और दूसरी बार पोस्ट-मानसून अवधि में कुओं का जलस्तर मापा जाएगा। इससे बारिश के बाद भूजल स्तर में हुए सुधार का तुलनात्मक अध्ययन भी संभव होगा।

मुख्य कार्यपालन अधिकारी जिला पंचायत दुर्ग बजरंग कुमार दुबे ने बताया कि ग्रामीण विकास मंत्रालय की गाइडलाइन के अनुसार इस बार भूजल स्तर मापन प्रक्रिया को अधिक वैज्ञानिक और एकरूप बनाया गया है। सभी ग्राम पंचायतों को निर्देश दिए गए हैं कि कुओं की माप केवल मेजरिंग टेप से की जाए, ताकि आंकड़ों की शुद्धता और विश्वसनीयता बनी रहे।

उन्होंने बताया कि इस बार ऐसे सूखे कुएं, जिनमें पानी उपलब्ध नहीं है, उन्हें भी सर्वे में शामिल किया जाएगा। इन मामलों में जलस्तर की जगह कुएं की कुल गहराई दर्ज की जाएगी। इसके लिए जलदूत मोबाइल एप में “कुएं की कुल गहराई” नामक नया पैरामीटर भी जोड़ा गया है। इससे भूजल संरचना और जल उपलब्धता का अधिक विस्तृत विश्लेषण किया जा सकेगा।