July 23, 2026

कोपरा रामसर वेटलैंड पर औद्योगिक गतिविधियों की मार, प्राथमिक सर्वे में कोल वाशरी और कोल डिपो पर उठे सवाल

बिलासपुर। छत्तीसगढ़ के रामसर स्थल कोपरा वेटलैंड पर आसपास संचालित औद्योगिक गतिविधियों का असर सामने आने लगा है। वन विभाग के प्राथमिक सर्वे में काले पानी की समस्या से जूझ रहे कोपरा रामसर के पांच किलोमीटर के दायरे में दो कोल वाशरी और कई कोल डिपो संचालित होने का उल्लेख किया गया है। विभाग का मानना है कि इन औद्योगिक गतिविधियों का प्रभाव जलाशय और उसके पारिस्थितिकी तंत्र पर पड़ सकता है।

वन विभाग की यह प्राथमिक सर्वे रिपोर्ट जिला वेटलैंड समिति के माध्यम से राज्य सरकार को भेज दी गई है। अब राज्य सरकार और केंद्र की संयुक्त टीम क्षेत्र का विस्तृत सर्वे करेगी, जिसके आधार पर कोपरा रामसर वेटलैंड के संरक्षण के लिए मास्टर प्लान तैयार किया जाएगा। इसी रिपोर्ट के आधार पर भविष्य में संरक्षण, प्रदूषण नियंत्रण और अन्य आवश्यक कदमों पर निर्णय लिया जाएगा।

करीब 210 हेक्टेयर (2.10 वर्ग किलोमीटर) क्षेत्र में फैले कोपरा जलाशय को सात महीने पहले रामसर साइट का दर्जा मिला था। इसके बाद वन विभाग ने इसके कैचमेंट क्षेत्र और आसपास संचालित गतिविधियों का प्रारंभिक अध्ययन कराया।

सर्वे रिपोर्ट में कोपरा, बेलमंडी, सैदा और संबलपुरी-बहतराई क्षेत्र में संचालित कोल वाशरी, कोल डिपो और अन्य औद्योगिक गतिविधियों का विस्तृत उल्लेख किया गया है। विभाग के अनुसार ये सभी क्षेत्र ऊंचाई पर स्थित हैं और बारिश का पानी इन्हीं इलाकों से बहकर सीधे कोपरा जलाशय के कैचमेंट क्षेत्र में पहुंचता है। ऐसे में औद्योगिक अपशिष्ट और प्रदूषण का प्रभाव जलाशय के पानी की गुणवत्ता पर पड़ने की आशंका जताई गई है।

अब विस्तृत सर्वे और मास्टर प्लान के जरिए रामसर स्थल के संरक्षण, जल गुणवत्ता सुधार और पर्यावरणीय संतुलन बनाए रखने के लिए आवश्यक कार्ययोजना तैयार की जाएगी।