July 23, 2026

CGPSC भर्ती घोटाले में ED की एंट्री, पूर्व चेयरमैन टामन सोनवानी समेत 5 ठिकानों पर छापेमारी

रायपुर/दुर्ग। छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग (CGPSC) भर्ती घोटाले की जांच में अब प्रवर्तन निदेशालय (ED) की भी एंट्री हो गई है। केंद्रीय एजेंसी ने बुधवार को घोटाले से जुड़े आरोपियों के पांच ठिकानों पर एक साथ छापेमारी की। ईडी की कार्रवाई पूर्व चेयरमैन टामन सोनवानी, पूर्व सचिव जीवन किशोर ध्रुव, पूर्व परीक्षा नियंत्रक आरती वासनिक, पूर्व आईएएस अधिकारी अमृत खलको और आरोपी ललित गणवीर के परिजनों तक पहुंची है।

जानकारी के मुताबिक, ईडी की टीम ने पूर्व चेयरमैन टामन सिंह सोनवानी के ग्राम सरबदा स्थित निवास पर दबिश दी। वहीं दो टीमों ने जीवन किशोर ध्रुव के भिलाई सेक्टर-10 स्थित घर में जांच की। इसके अलावा आरती वासनिक के रायपुर स्थित निवास पर भी छापेमारी की गई।

ईडी की एक अन्य टीम ने आरोपी ललित गणवीर के भाई और कृषि विस्तार अधिकारी भूपेंद्र गणवीर के राजनांदगांव स्थित शिक्षक कॉलोनी आवास पर जांच की। वहीं राज्यपाल के पूर्व सचिव एवं पूर्व आईएएस अधिकारी अमृत खलको के तालपुरी, भिलाई स्थित निवास पर भी कार्रवाई की गई। टीम परिवार के सदस्यों से पूछताछ कर दस्तावेजों और वित्तीय रिकॉर्ड की जांच कर रही है।

बताया जा रहा है कि अमृत खलको के पुत्र निखिल और पुत्री नेहा का चयन डिप्टी कलेक्टर पद पर हुआ था। अमृत खलको बालोद कलेक्टर, बस्तर संभाग आयुक्त, समाज कल्याण आयुक्त और बीज निगम के प्रबंध संचालक जैसे महत्वपूर्ण पदों पर कार्य कर चुके हैं। राज्यपाल सचिवालय में भी उनकी नियुक्ति रही थी। भर्ती घोटाले में नाम सामने आने के बाद उन्हें पद से हटा दिया गया था।

2020 से 2022 के बीच सामने आया था घोटाला

CGPSC भर्ती घोटाला वर्ष 2020 से 2022 के बीच आयोजित भर्ती परीक्षाओं और इंटरव्यू प्रक्रिया से जुड़ा है। आरोप है कि प्रभावशाली लोगों के रिश्तेदारों और परिचितों को लाभ पहुंचाने के लिए चयन प्रक्रिया में बड़े पैमाने पर अनियमितताएं की गईं। इससे डिप्टी कलेक्टर, डीएसपी समेत कई प्रतिष्ठित पदों पर हुए चयन सवालों के घेरे में आ गए।

जुलाई 2023 में राज्य सरकार ने मामले की जांच सीबीआई को सौंप दी थी। जांच में आरोप सामने आए कि तत्कालीन अध्यक्ष टामन सोनवानी ने नियमों में बदलाव कर अपने परिजनों को लाभ पहुंचाया। प्रश्नपत्र लीक कराने और चयन प्रक्रिया में हस्तक्षेप जैसे गंभीर आरोप भी लगाए गए।

सीबीआई पहले ही टामन सोनवानी, उप नियंत्रक ललित गणवीर, श्रवण कुमार गोयल, शशांक गोयल, भूमिका कटियार, निशा कोसले, दीपा आदिल, सुमित ध्रुव समेत कई आरोपियों को गिरफ्तार कर चुकी है। इनमें से कुछ आरोपियों को बाद में जमानत मिल चुकी है, जबकि कई आरोपी अब भी न्यायिक हिरासत में हैं।

ईडी की ताजा कार्रवाई को भर्ती घोटाले में कथित वित्तीय लेन-देन और मनी लॉन्ड्रिंग के पहलुओं की जांच से जोड़कर देखा जा रहा है। एजेंसी की छापेमारी के बाद मामले में नए खुलासों की संभावना बढ़ गई है।