January 16, 2026

महादेव ऑनलाइन सट्टेबाजी मामले में ED की बड़ी कार्रवाई, ₹91.82 करोड़ की संपत्ति अटैच

रायपुर। प्रवर्तन निदेशालय (ED), रायपुर जोनल ऑफिस ने प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (PMLA), 2002 के तहत महादेव ऑनलाइन बुक (MOB) और Skyexchange.com से जुड़े अवैध सट्टेबाजी संचालन के मामले में बड़ी कार्रवाई की है। ED ने इस प्रकरण में कुल लगभग ₹91.82 करोड़ की चल और अचल संपत्तियों को प्रोविजनल अटैचमेंट ऑर्डर (PAO) के तहत अटैच किया है।

इस कार्रवाई के तहत ED ने Miss Perfect Plan Investment LLC और M/s Exim General Trading-GZCO के नाम पर रखे गए ₹74.28 करोड़ से अधिक के बैंक बैलेंस को अटैच किया है। जांच में सामने आया है कि ये संस्थाएं सौरभ चंद्राकर, अनिल कुमार अग्रवाल और विकास छपारिया से जुड़ी हैं, जिनका इस्तेमाल अपराध की कमाई (PoC) को वैध निवेश के रूप में दिखाने के लिए किया गया।

इसके अलावा, Skyexchange.com के मालिक हरि शंकर टिबरेवाल के करीबी सहयोगी गगन गुप्ता की लगभग ₹17.5 करोड़ की संपत्तियां भी अटैच की गई हैं। इनमें गगन गुप्ता और उसके परिवार के सदस्यों के नाम पर खरीदी गई महंगी रियल एस्टेट और लिक्विड एसेट्स शामिल हैं, जिन्हें अवैध सट्टेबाजी से प्राप्त नकदी से खरीदा गया था।

ED की जांच में क्या सामने आया

ED की जांच में खुलासा हुआ है कि महादेव ऑनलाइन बुक, Skyexchange.com जैसे अवैध सट्टेबाजी ऐप्स के जरिए भारी मात्रा में अपराध की कमाई की गई। इस रकम को बेनामी बैंक खातों के जटिल नेटवर्क के माध्यम से लॉन्डर किया गया। जांच एजेंसी के अनुसार, महादेव ऑनलाइन बुक एप्लिकेशन को एक ऐसे प्लेटफॉर्म के रूप में तैयार किया गया था, जो विभिन्न अवैध सट्टेबाजी वेबसाइटों और मोबाइल ऐप्स को ग्राहकों से जोड़ने और उनके वित्तीय संचालन को संभालने में मदद करता था।

हालांकि, इन प्लेटफॉर्म्स को इस तरह से डिजाइन किया गया था कि अंततः सभी ग्राहक नुकसान में रहें। इस तरीके से हजारों करोड़ रुपये की अवैध कमाई की गई, जिसे पहले से तय प्रॉफिट-शेयरिंग मॉडल के तहत बांटा गया।

हवाला, फर्जी KYC और क्रिप्टो का इस्तेमाल

ED के मुताबिक, बैंक खाते खोलने के लिए फर्जी और चोरी किए गए KYC दस्तावेजों का इस्तेमाल किया गया। अवैध सट्टेबाजी से हुई कमाई को छिपाने के लिए मल्टी-लेयरिंग की गई और इन लेन-देन को न तो रिकॉर्ड किया गया और न ही टैक्स के दायरे में लाया गया।

जांच में यह भी सामने आया कि इस अवैध कमाई को हवाला चैनलों, ट्रेड-बेस्ड मनी लॉन्ड्रिंग और क्रिप्टो एसेट्स के जरिए भारत से बाहर भेजा गया। बाद में इस पैसे को विदेशी FPIs के जरिए भारतीय शेयर बाजार में निवेश के रूप में वापस लाया गया।

ED ने एक जटिल “कैशबैक स्कीम” का भी खुलासा किया है, जिसमें FPI कंपनियां भारतीय लिस्टेड कंपनियों में भारी निवेश करती थीं और बदले में कंपनी प्रमोटरों को निवेश की 30 से 40 प्रतिशत राशि नकद लौटाई जाती थी। इस तरह के लेन-देन से गगन गुप्ता को कम से कम ₹98 करोड़ (PoC) का लाभार्थी पाया गया है, जो Salasar Techno Engineering Ltd. और Tiger Logistics Ltd. जैसी कंपनियों से जुड़े थे।

अब तक की कार्रवाई

ED अब तक इस मामले में 175 से अधिक ठिकानों पर तलाशी ले चुकी है। जांच के दौरान लगभग ₹2,600 करोड़ की चल और अचल संपत्तियां जब्त, फ्रीज या अटैच की जा चुकी हैं।

इसके साथ ही, ED ने इस केस में 13 लोगों को गिरफ्तार किया है और अब तक दायर की गई पांच अभियोजन शिकायतों में 74 कंपनियों को आरोपी बनाया गया है। जांच अभी भी जारी है।