July 23, 2026

30 साल पुराने 1.86 करोड़ के हाउसिंग लोन घोटाले में EOW की बड़ी कार्रवाई, 15 हजार पन्नों का चालान कोर्ट में पेश

रायपुर। आर्थिक अपराध अन्वेषण शाखा (EOW) रायपुर ने करीब 30 साल पुराने गृह निर्माण ऋण गबन मामले में बड़ी कार्रवाई करते हुए तीन आरोपियों के खिलाफ विशेष न्यायाधीश की अदालत में 15 हजार पन्नों का चालान पेश किया है। आरोप है कि सरकारी आवासीय योजना के तहत आधुनिक गृह निर्माण सहकारी समिति मर्यादित के 186 सदस्यों के नाम पर 1 करोड़ 86 लाख रुपये का गृह निर्माण ऋण फर्जी दस्तावेजों के आधार पर स्वीकृत कराकर उसका गबन किया गया। ब्याज सहित यह राशि अब बढ़कर 104 करोड़ रुपये के डूबत ऋण में बदल चुकी है।

1995 से 1998 के बीच हुआ था घोटाला

EOW के अनुसार, यह मामला वर्ष 1995 से 1998 के बीच का है। जरूरतमंद लोगों के लिए संचालित सरकारी आवासीय योजना के तहत आधुनिक गृह निर्माण सहकारी समिति के तत्कालीन अध्यक्ष थावरदास माधवानी ने मध्यप्रदेश राज्य सहकारी आवास संघ मर्यादित, भोपाल के रायपुर क्षेत्रीय कार्यालय के अधिकारियों से कथित साठगांठ कर समिति के 186 सदस्यों के नाम पर प्रति सदस्य 1 लाख रुपये के हिसाब से कुल 1.86 करोड़ रुपये का गृह निर्माण ऋण स्वीकृत कराया।

भौतिक सत्यापन में खुला फर्जीवाड़ा

जांच के दौरान जब भौतिक सत्यापन किया गया तो ऋण दस्तावेजों में जिन स्थानों रायपुरा और पंडरी कांपा में मकान निर्मित होने का दावा किया गया था, वहां एक भी मकान नहीं मिला। इसके अलावा जिन लोगों के नाम पर ऋण स्वीकृत किया गया था, वे संबंधित पतों पर मौजूद नहीं मिले।

फर्जी प्रमाण-पत्रों के सहारे निकाली गई राशि

जांच में सामने आया कि तत्कालीन अध्यक्ष थावरदास माधवानी, तत्कालीन आवास पर्यवेक्षक बसंत कुमार साहू और सहकारी आवास संघ, भोपाल के तत्कालीन प्रबंधक प्रदीप कुमार निखरा ने कथित आपराधिक षड्यंत्र रचकर फर्जी उपयोगिता प्रमाण-पत्र और भवन निर्माण पूर्णता प्रमाण-पत्र तैयार किए। इन्हीं दस्तावेजों के आधार पर ऋण स्वीकृत कराकर राशि का गबन किया गया।

1.86 करोड़ का ऋण बढ़कर हुआ 104 करोड़

EOW के मुताबिक, इस कथित धोखाधड़ी से राज्य सहकारी आवास संघ को भारी आर्थिक नुकसान हुआ है। 31 दिसंबर 2025 तक मूलधन और ब्याज मिलाकर यह ऋण बढ़कर 104 करोड़ रुपये का डूबत ऋण बन चुका है।

पुराने मामलों में भी तेज हुई कार्रवाई

EOW ने बताया कि लंबित पुराने मामलों की भी प्राथमिकता के आधार पर जांच की जा रही है। पर्याप्त दस्तावेजी और तकनीकी साक्ष्य जुटाने के बाद ही इस मामले में 15 हजार पन्नों का चालान विशेष न्यायालय में प्रस्तुत किया गया है। एजेंसी का कहना है कि दोषियों के खिलाफ कानून के अनुसार आगे की कार्रवाई जारी रहेगी।