September 4, 2026

हथियारों के साथ जंगलों में घूमने वाले माओवादी बिछड़े तो छलके आंसू, विदाई में एक-दूसरे से गले लगकर रोए

जगदलपुर। कभी घने जंगलों में AK-47 जैसे आधुनिक हथियारों के साथ घूमने वाले और एक-दूसरे के लिए जान देने को तैयार रहने वाले माओवादियों की जिंदगी अब पूरी तरह बदल रही है। आत्मसमर्पण के बाद सामान्य जीवन की ओर लौट रहे पूर्व माओवादी जब एक-दूसरे से बिछड़े तो भावुक हो गए। विदाई के दौरान उन्होंने एक-दूसरे को गले लगाया और आंखों से आंसू छलक पड़े।

गढ़चिरौली में शुरू हुआ पुनर्वास का नया चरण

महाराष्ट्र के गढ़चिरौली में आत्मसमर्पण करने वाले माओवादियों के पुनर्वास की प्रक्रिया अब अगले चरण में पहुंच गई है। पिछले साल पूर्व माओवादी नेता वेणुगोपाल राव उर्फ भूपति के नेतृत्व में बड़ी संख्या में माओवादियों ने आत्मसमर्पण किया था। सुरक्षा कारणों से इन्हें गढ़चिरौली के पुलिस पुनर्वास केंद्र में रखा गया था।

पुनर्वास केंद्र में पूर्व माओवादियों को सामान्य जीवन में लौटने के लिए अलग-अलग तरह की सुविधाएं और प्रशिक्षण दिए गए। कई लोगों को स्किल ट्रेनिंग दी गई, जबकि कुछ पूर्व माओवादियों के रिवर्स नसबंदी ऑपरेशन भी कराए गए। वहीं, कुछ माओवादी जोड़ों ने शादी कर नई जिंदगी की शुरुआत की।

50 पूर्व माओवादियों की घर वापसी

अब पुनर्वास प्रक्रिया के तहत पूर्व माओवादियों को धीरे-धीरे उनके मूल गांव और जिलों में वापस भेजा जा रहा है। पहले चरण में 50 पूर्व माओवादियों को गढ़चिरौली से बस्तर के अलग-अलग जिलों में स्थित उनके गृहग्राम के लिए रवाना किया गया।

हालांकि, विदाई के दौरान सामने आई तस्वीरों ने इस पूरी प्रक्रिया का भावुक पहलू सामने ला दिया। कभी जंगलों में हथियार लेकर साथ चलने वाले ये लोग अब एक-दूसरे से बिछड़ने के दर्द में गले लगकर रोते नजर आए।

जम्पन्ना ने पुनर्वास प्रक्रिया पर उठाए सवाल

इस पूरी प्रक्रिया को लेकर पूर्व माओवादी नेता जिनुगु नरसिम्हा रेड्डी उर्फ जम्पन्ना ने सवाल भी उठाए हैं। प्रेस नोट जारी कर उन्होंने कहा कि आत्मसमर्पण करने वाले माओवादियों को लंबे समय तक पुनर्वास केंद्र में पुलिस निगरानी में रखने के बजाय जल्द से जल्द उनके घर भेजा जाना चाहिए, ताकि वे सामान्य जीवन में वापस लौट सकें।

कुल मिलाकर, कभी जंगल और बंदूक से जुड़ी जिंदगी अब गांव और सामान्य जीवन की ओर लौट रही है। विदाई की भावुक तस्वीरें इस बदलाव की कहानी बयां कर रही हैं—अब संघर्ष बंदूक से नहीं, बल्कि सामान्य जिंदगी जीकर आगे बढ़ने का है।