धमतरी। छत्तीसगढ़ के प्रमुख जलाशयों में शामिल रविशंकर सागर यानी गंगरेल बांध लगातार हो रही मूसलाधार बारिश से लबालब हो गया है। बांध में 87 फीसदी से ज्यादा पानी भर चुका है और कैचमेंट एरिया में अब भी बारिश का दौर जारी है। बढ़ते जलस्तर को देखते हुए जिला प्रशासन अलर्ट मोड पर है।
गंगरेल बांध से सैकड़ों गांवों की सिंचाई और जलापूर्ति जुड़ी हुई है। ऐसे में लगातार बढ़ता जलस्तर जहां किसानों के लिए राहत की खबर है, वहीं निचले इलाकों में बाढ़ का खतरा भी बढ़ गया है।
कई बांधों में तेजी से बढ़ रहा जलस्तर
गंगरेल के साथ मुरुमसिल्ली, दुधावा और सोंढूर बांध में भी पानी की आवक बढ़ी है। प्रशासन लगातार जलस्तर और कैचमेंट एरिया में हो रही बारिश पर नजर बनाए हुए है।
जिला प्रशासन ने सैलानियों और निचले इलाकों में रहने वाले ग्रामीणों को नदी और जलाशयों के किनारे नहीं जाने की सलाह दी है। अधिकारियों के मुताबिक, यदि बारिश का सिलसिला इसी तरह जारी रहा तो गंगरेल बांध के गेट खोले जा सकते हैं।
गेट खुलने पर 72 गांवों पर बढ़ सकता है खतरा
जानकारी के मुताबिक, गंगरेल से करीब 55 हजार क्यूसेक पानी छोड़े जाने पर 72 गांवों में बाढ़ का खतरा बढ़ जाता है। इससे पहले गंगरेल के गेट खुलने के दौरान करीब 1.31 लाख क्यूसेक पानी छोड़े जाने से निचले इलाकों में स्थिति गंभीर हो गई थी।
फिलहाल महानदी में पानी की आवक करीब 12.97 टीएमसी बताई जा रही है और नदी का बहाव सामान्य है। हालांकि, लगातार बारिश के चलते ओडिशा सीमा तक के निचले इलाकों में भी लोगों की चिंता बढ़ गई है।
2024 जैसी बाढ़ की आशंका से बढ़ी चिंता
गंगरेल के बढ़ते जलस्तर ने एक बार फिर 2024 में आई बाढ़ की यादें ताजा कर दी हैं। प्रशासन लगातार हालात पर नजर रख रहा है और संभावित स्थिति को देखते हुए आवश्यक तैयारियां की जा रही हैं।
एक ओर अच्छी बारिश से किसानों को राहत मिली है और सिंचाई के साथ भूजल स्तर में सुधार की उम्मीद बढ़ी है, वहीं दूसरी ओर गंगरेल का तेजी से भरना निचले इलाकों के लिए चिंता का कारण बन गया है। अब सबकी नजर बांध के जलस्तर और आने वाले दिनों में बारिश की स्थिति पर टिकी है।





