गरियाबंद। छत्तीसगढ़ के गरियाबंद जिले में आदिवासी विकास विभाग के तहत कराए गए करोड़ों रुपये के विकास कार्यों में गंभीर अनियमितताएं सामने आई हैं। स्कूल जतन योजना के अधूरे निर्माण, स्कूलों में शौचालय निर्माण में भारी देरी और स्वीकृत पदों से अधिक कर्मचारियों की नियुक्तियों ने जिला प्रशासन की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। कलेक्टर भगवान सिंह उइके ने गड़बड़ियों को स्वीकार करते हुए जांच, वसूली और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की बात कही है।
स्कूल जतन योजना के 2.88 करोड़ रुपये के काम अधूरे
स्कूल जतन योजना के तहत जिले में 830 स्कूलों के निर्माण एवं मरम्मत कार्य ग्रामीण यांत्रिकी सेवा (RES) को सौंपे गए थे, जिन्हें लगभग पूरा कर लिया गया। वहीं आदिवासी विकास विभाग को दिए गए 165 कार्यों में 50 से अधिक निर्माण अब भी अधूरे हैं। इनमें 24 कार्य ऐसे हैं जिनके लिए महासमुंद की मेसर्स सुनील कंस्ट्रक्शन, कोरबा के अजय कुमार राठौर और जयनारायण यादव की फर्मों को अग्रिम भुगतान किया गया, लेकिन निर्माण पूरा नहीं हुआ। विभाग ने इन एजेंसियों से करीब 2.88 करोड़ रुपये की वसूली के लिए नोटिस जारी किया है। सात दिन के भीतर राशि जमा नहीं होने पर एफआईआर दर्ज कराने की चेतावनी दी गई है।
शौचालय निर्माण में देरी, 61 लाख एडवांस के बाद भी बने सिर्फ 23 टॉयलेट
जिले के 116 स्कूलों में शौचालय निर्माण के लिए लगभग 1 करोड़ रुपये स्वीकृत किए गए थे। निर्माण कार्य दुर्ग की कंचन कंस्ट्रक्शन को सौंपते ही 61 लाख रुपये का अग्रिम भुगतान कर दिया गया। करीब 10 महीने बीतने के बाद भी केवल 23 शौचालय बन सके। इसके बाद प्रशासन ने शेष राशि में से 36 लाख रुपये की वसूली के लिए नोटिस जारी किया, लेकिन अब तक भुगतान नहीं हुआ है। स्थानीय जनप्रतिनिधियों ने ठेका कंपनी को ब्लैकलिस्ट न करने पर भी सवाल उठाए हैं।
स्वीकृत पदों से दोगुनी नियुक्तियां, 3.84 करोड़ रुपये वेतन बकाया
आदिवासी विकास विभाग ने जिले की 79 आश्रम-शालाओं में स्वीकृत 255 पदों के मुकाबले 513 कर्मचारियों की नियुक्ति कर दी। आरोप है कि कई नियुक्तियां मौखिक आदेश, सिफारिश और पैसों के लेन-देन के आधार पर की गईं। बजट केवल स्वीकृत पदों के अनुसार मिलने से कर्मचारियों को रोटेशन के आधार पर वेतन दिया जाता रहा। दिसंबर 2025 में अतिरिक्त कर्मचारियों की सेवाएं समाप्त कर दी गईं, जिसके बाद से उनका वेतन बकाया है। मार्च 2026 में शासन से 3.84 करोड़ रुपये के लंबित वेतन की मांग की गई है।
कलेक्टर बोले- दोषियों पर होगी कार्रवाई
कलेक्टर भगवान सिंह उइके ने माना कि आदिवासी विकास विभाग के कई कार्य अधूरे हैं और उनका भौतिक सत्यापन कराया जा चुका है। संबंधित ठेकेदारों को नोटिस जारी किए गए हैं। यदि राशि जमा नहीं होती है तो अन्य जिलों में आरआरसी प्रकरण दर्ज कर संपत्ति कुर्क कर वसूली की जाएगी।
जब उनसे पूछा गया कि बिना कलेक्टर की मंजूरी के कार्य आवंटित नहीं होते, तो जिम्मेदारी किसकी है, इस पर उन्होंने कहा कि कुछ मामले उनके कार्यकाल से पहले के हैं और कुछ उनके कार्यकाल के दौरान हुए। उन्होंने तत्कालीन सहायक आयुक्त नवीन भगत के कार्यकाल में गड़बड़ियां होने की बात कहते हुए बताया कि पूरे मामले की जांच कर शासन को रिपोर्ट भेजी जा रही है।
कलेक्टर ने कहा, “अब जो हो गया, सो हो गया। हमारी कोशिश है कि सभी गड़बड़ियों को सुधारा जाए और जिम्मेदार लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए।”





