May 14, 2026

गरियाबंद: 510 करोड़ की वन भूमि पर कब्जा विवाद, डिजिटल साक्ष्य को अतिक्रमणकारियों ने दी चुनौती

गरियाबंद। Udanti Sitanadi Wildlife Sanctuary में 510 करोड़ रुपये मूल्य की 850 हेक्टेयर वन भूमि से अवैध कब्जा हटाने के बाद अब नया विवाद खड़ा हो गया है। प्रशासन द्वारा जिन डिजिटल साक्ष्यों के आधार पर कार्रवाई की गई थी, उन्हीं को अब अतिक्रमणकारी चुनौती दे रहे हैं।

265 एकड़ में पेड़ों की कटाई, 166 आरोपी पहुंचे दफ्तर

सीतानदी रेंज के जैतपुरी क्षेत्र से लगे इलाके में पिछले 15 वर्षों में हजारों पेड़ों की कटाई कर लगभग 265 एकड़ जमीन पर कब्जा किया गया। इस मामले में 166 आरोपी एक साथ अभयारण्य कार्यालय पहुंचे और लिखित जवाब प्रस्तुत किया।

आरोपियों का दावा है कि वे “प्रकृति प्रेमी” हैं और अपने पूर्वजों की जमीन पर खेती कर रहे हैं। उनका कहना है कि उन्होंने किसी प्रकार का नियम नहीं तोड़ा है और जिस क्षेत्र को वन भूमि बताया जा रहा है, वह उनके निजी क्षेत्र का हिस्सा है।

डिजिटल साक्ष्य पर सवाल, प्रशासन का पलटवार

अतिक्रमणकारियों ने सैटेलाइट इमेज और डिजिटल रिकॉर्ड को गलत बताते हुए कार्रवाई पर सवाल उठाए हैं।
वहीं उपनिदेशक वरुण जैन के अनुसार उपलब्ध सैटेलाइट डेटा में स्पष्ट है कि 2008 के बाद बड़े पैमाने पर पेड़ों की कटाई कर कब्जा किया गया।

कोर्ट में तय होगा सच

प्रशासन ने 166 आरोपियों के खिलाफ वाइल्डलाइफ एक्ट के तहत प्रकरण दर्ज किया है।
मामले में सभी डिजिटल और भौतिक साक्ष्य न्यायालय में पेश किए जाएंगे, जहां अब अंतिम फैसला होगा।

850 हेक्टेयर भूमि से हटाया गया कब्जा

अभियान के तहत घोरागांव, सोरमाल, बनवापारा समेत कई क्षेत्रों में कार्रवाई कर कुल 850 हेक्टेयर जमीन को अतिक्रमण से मुक्त कराया गया, जिसकी अनुमानित कीमत 510 करोड़ रुपये बताई गई है।

बेदखली के बाद हरियाली बहाल

मुक्त कराई गई जमीन पर पौधरोपण और जल संरक्षण के कार्य शुरू किए गए हैं। कंटूर ट्रेंच जैसे संरचनाओं के जरिए पर्यावरण संतुलन बहाल करने की कोशिश की जा रही है।