July 30, 2026

गर्भवती की मौत मामले में बड़ा एक्शन, डीडी अस्पताल संचालक और एम्बुलेंस कर्मियों पर FIR दर्ज

गौरेला-पेंड्रा-मरवाही। जिले में गर्भवती महिला की मौत के मामले में पुलिस ने बड़ी कार्रवाई करते हुए सेमरा स्थित डीडी अस्पताल के संचालक और एम्बुलेंस कर्मियों के खिलाफ अपराध दर्ज किया है। कथित चिकित्सा लापरवाही, अवैध वसूली और मरीज को रेफर अस्पताल के बजाय निजी अस्पताल ले जाने के आरोपों के बाद प्रशासन ने अस्पताल को सील करने की प्रक्रिया भी शुरू कर दी है।

पुलिस ने डीडी अस्पताल संचालक Akhilesh Tiwari तथा संबंधित एम्बुलेंस कर्मियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 318(4), 125(2) और 61(2) के तहत मामला दर्ज किया है।

रेफर मरीज को निजी अस्पताल ले जाने का आरोप

जानकारी के अनुसार, बसंतपुर निवासी कैलाश कुमार सोनवानी की 22 वर्षीय पुत्री ज्योति सोनवानी को प्रसव पीड़ा होने पर जिला अस्पताल जीपीएम में भर्ती कराया गया था। जांच के दौरान चिकित्सकों ने बताया कि गर्भ में पल रहे शिशु की मृत्यु हो चुकी है और महिला की हालत भी गंभीर है। इसके बाद उसे बेहतर उपचार के लिए बिलासपुर स्थित सिम्स रेफर किया गया था।

परिजनों का आरोप है कि बिलासपुर ले जाते समय एम्बुलेंस कर्मियों ने मरीज की स्थिति को अत्यधिक गंभीर बताकर उन्हें भयभीत किया और रास्ते में उसे सिम्स ले जाने के बजाय कथित रूप से सेमरा स्थित डीडी अस्पताल पहुंचा दिया।

इलाज के नाम पर 2 लाख रुपये वसूलने का आरोप

परिजनों का दावा है कि निजी अस्पताल में मरीज को पूरी तरह ठीक करने का भरोसा देकर लगभग 2 लाख रुपये खर्च होने की बात कही गई। इसके बाद इलाज और प्रक्रिया के नाम पर किश्तों में रकम ली गई।

आरोप है कि पहले 1 लाख रुपये जमा कराए गए और बाद में मरीज को दूसरे अस्पताल ले जाने की बात पर अस्पताल प्रबंधन ने पूरा भुगतान करने के बाद ही छुट्टी देने की शर्त रखी। परिजनों का कहना है कि कई दिनों तक अस्पताल में रखने के बावजूद मरीज की हालत लगातार बिगड़ती रही।

सिम्स में उपचार के दौरान हुई मौत

जब ज्योति सोनवानी की स्थिति बेहद गंभीर हो गई, तब उसे बिलासपुर भेजा गया। हालांकि उपचार के दौरान सिम्स में उसकी मौत हो गई। घटना के बाद परिजनों और स्थानीय लोगों में भारी आक्रोश फैल गया।

गुस्साए लोगों ने गौरेला-पेंड्रा मुख्य मार्ग पर चक्काजाम कर प्रदर्शन किया। इस दौरान पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच तनाव की स्थिति भी बनी। बढ़ते विरोध के बीच अस्पताल प्रबंधन द्वारा कथित रूप से परिजनों को वसूले गए 2 लाख रुपये वापस किए जाने की भी जानकारी सामने आई है।

CMHO से मांगी गई रिपोर्ट

गौरेला थाना प्रभारी Shanip Ratre ने बताया कि परिजनों की शिकायत पर अपराध दर्ज कर लिया गया है। मामले में चिकित्सा लापरवाही की तकनीकी जांच के लिए मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (CMHO) से विस्तृत रिपोर्ट मांगी गई है।

पुलिस के अनुसार रिपोर्ट मिलने के बाद आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी। प्रशासन ने संकेत दिए हैं कि जांच में आरोप सही पाए जाने पर अस्पताल को सील करने सहित कड़ी कार्रवाई की जा सकती है। साथ ही इस पूरे मामले में जिला अस्पताल के कुछ कर्मचारियों या चिकित्सकों की संभावित भूमिका की भी जांच की जा रही है।

यह मामला सामने आने के बाद जिले में निजी अस्पतालों की कार्यप्रणाली, रेफरल सिस्टम और मरीजों के उपचार मानकों को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।