रायपुर। भारत के लिए स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से राहत की खबर आई है। भारतीय झंडे वाला एलपीजी टैंकर ‘ग्रीन सान्वी’ ने सफलतापूर्वक होर्मुज स्ट्रेट पार कर लिया है। इस जहाज में लगभग 46,000 मीट्रिक टन एलपीजी है और अनुमान है कि यह 6 अप्रैल तक मुंबई पहुंच जाएगा। मार्च महीने में यह होर्मुज पार करने वाला सातवां भारतीय जहाज बन गया।
जहाज ट्रैकिंग डेटा के अनुसार, ‘ग्रीन सान्वी’ फारस की खाड़ी में खड़ा था और ईरानी समुद्री इलाके से होते हुए होर्मुज स्ट्रेट के पूरब में पहुंचा। इस एलपीजी की मात्रा देश की आधा दिन की LPG खपत के बराबर है।
शिपिंग मंत्रालय के अधिकारियों ने बताया कि जहाज में कुल 46,655 मीट्रिक टन एलपीजी है। इसके आने से कुकिंग गैस की किल्लत झेल रहे लाखों परिवारों को राहत मिलने की उम्मीद है। इससे पहले दो अन्य एलपीजी जहाज – ‘जग वसंत’ (कांडला) और ‘पाइन गैस’ (न्यू मंगलौर) – भारत पहुंच चुके हैं, जिनसे लगभग 92,000 मीट्रिक टन ईंधन की आपूर्ति हुई।
अभी संकट टला नहीं
हालांकि, ‘ग्रीन आशा’ और ‘जग विक्रम’ सहित अन्य जहाज अभी भी सुरक्षित मार्ग के लिए नौसेना के निर्देशों का इंतजार कर रहे हैं। नौसेना चरणबद्ध तरीके से इन जहाजों को निकालने की रणनीति पर काम कर रही है, विशेष प्राथमिकता उन जहाजों को दी जा रही है जो एलपीजी और कच्चे तेल ढो रहे हैं।
एलपीजी टैंकर BW ELM को एन्नोर बंदरगाह की ओर मोड़ दिया गया है और यह 4 अप्रैल तक पहुंचने की संभावना है।
17 जहाजों का इंतजार
शिपिंग महानिदेशालय की रिपोर्ट के अनुसार, फारस की खाड़ी के पश्चिमी हिस्से में 17 भारतीय जहाज फंसे हुए हैं। इनमें से 5 जहाज SCI के हैं। ओमान की खाड़ी, अदन की खाड़ी और लाल सागर में भी भारतीय जहाज तैनात हैं। इन जहाजों पर कुल 20,500 भारतीय नाविक हैं, जिनमें से 504 भारतीय ध्वज वाले जहाजों पर हैं।
सरकार की रणनीति दो मोर्चों पर काम कर रही है:
- कूटनीतिक प्रयास: ईरान के साथ बातचीत करके स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को सुरक्षित और खुला बनाना।
- सुरक्षा उपाय: भारतीय नौसेना के माध्यम से फंसे जहाजों और नाविकों की सुरक्षा सुनिश्चित करना।





