May 14, 2026

उज्बेकिस्तान की युवतियों की हाईकोर्ट में याचिका, अवैध हिरासत का आरोप; केंद्र-राज्य से जवाब तलब

बिलासपुर। अवैध रूप से भारत में रह रही उज्बेकिस्तान की दो युवतियों ने कथित गैरकानूनी हिरासत से मुक्ति के लिए हाईकोर्ट में बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका दायर की है। मामले की सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने केंद्र और राज्य सरकार से दो सप्ताह के भीतर जवाब प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं।

मामले के अनुसार, रायपुर के तेलीबांधा थाना क्षेत्र के एक होटल में इन युवतियों के अवैध रूप से रहने की सूचना मिलने पर पुलिस ने फरवरी 2026 में उन्हें हिरासत में लिया था। विदेशी नागरिक होने के कारण जांच की जिम्मेदारी इंटेलिजेंस ब्यूरो (IB) को सौंपी गई।

याचिका में दावा किया गया है कि 14 जनवरी 2026 से दोनों को लगातार हिरासत में रखा गया है, जो पूरी तरह गैरकानूनी और उनके मौलिक अधिकारों का उल्लंघन है। याचिकाकर्ताओं का आरोप है कि उन्हें बिना औपचारिक गिरफ्तारी और बिना किसी सक्षम न्यायालय के समक्ष पेश किए रायपुर सेंट्रल जेल के डिटेंशन सेंटर में रखा गया।

याचिका में यह भी उल्लेख किया गया है कि संबंधित एफआईआर (नंबर 117/2026) 12 मार्च 2026 को दर्ज की गई, जबकि युवतियों को 9 जनवरी 2026 को ही हिरासत में ले लिया गया था। इससे स्पष्ट होता है कि लंबे समय तक बिना किसी दर्ज मामले के उन्हें हिरासत में रखा गया।

पिटीशनर्स के वकील ने दलील दी कि गिरफ्तारी और हिरासत से जुड़ी अनिवार्य कानूनी प्रक्रियाओं का पालन नहीं किया गया है और यह शक्ति का दुरुपयोग है। उन्होंने यह भी बताया कि 16 अप्रैल 2026 को मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट द्वारा दिए गए आदेश से भी यह स्थिति स्पष्ट होती है।

वहीं राज्य और केंद्र की ओर से पेश डिप्टी एडवोकेट जनरल ने जवाब दाखिल करने के लिए दो सप्ताह का समय मांगा, जिसे अदालत ने स्वीकार कर लिया। साथ ही याचिकाकर्ता पक्ष को जवाब के बाद एक सप्ताह में प्रतिउत्तर दाखिल करने का निर्देश दिया गया है।

मामले की अगली सुनवाई अब दोनों पक्षों के जवाब आने के बाद होगी।