July 23, 2026

बर्खास्त सहायक शिक्षिका को हाईकोर्ट से बड़ी राहत, सेवा समाप्ति का आदेश निरस्त

बिलासपुर। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने बालोद जिले की सहायक शिक्षिका तस्लीम बानो को बड़ी राहत देते हुए उनकी सेवा से बर्खास्तगी का आदेश निरस्त कर दिया है। न्यायालय ने मुख्य कार्यपालन अधिकारी, जनपद पंचायत डौंडीलोहारा द्वारा 24 अगस्त 2021 को जारी बर्खास्तगी आदेश को अवैध मानते हुए याचिका स्वीकार कर ली।

तस्लीम बानो वर्ष 2005 में सहायक शिक्षक पंचायत के पद पर नियुक्त हुई थीं और वर्ष 2009 में उनका नियमितीकरण हुआ था। पारिवारिक कारणों से उन्होंने फरवरी 2015 में अवैतनिक अवकाश के लिए आवेदन दिया था। इसके बाद नवंबर 2020 में व्यक्तिगत कारणों का हवाला देते हुए पद से त्यागपत्र भी सौंपा, लेकिन विभाग ने त्यागपत्र स्वीकार करने के बजाय विभागीय जांच शुरू कर उन्हें सेवा से बर्खास्त कर दिया।

बर्खास्तगी के खिलाफ तस्लीम बानो ने छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट में याचिका दायर की। मामले की अंतिम सुनवाई 7 जुलाई 2026 को न्यायमूर्ति राकेश मोहन पांडेय की अदालत में हुई।

याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता मतीन सिद्दीकी ने दलील दी कि नियमित कर्मचारी होने के बावजूद विभाग ने बिना उचित सुनवाई का अवसर दिए और गलत नियम के तहत कार्रवाई करते हुए बर्खास्त किया। उन्होंने बताया कि याचिकाकर्ता पर छत्तीसगढ़ पंचायत सेवा (अनुशासन एवं अपील) नियम, 1999 के नियम-7 के तहत कार्रवाई होनी चाहिए थी, जबकि विभाग ने नियम-10 के तहत कार्रवाई की।

दलीलों से सहमत होते हुए हाईकोर्ट ने मुख्य कार्यपालन अधिकारी, जनपद पंचायत डौंडीलोहारा द्वारा जारी बर्खास्तगी आदेश को निरस्त कर दिया और तस्लीम बानो की याचिका स्वीकार कर ली। कोर्ट के इस फैसले को सेवा संबंधी मामलों में प्राकृतिक न्याय और विधिसम्मत प्रक्रिया के पालन के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।