March 3, 2026

वैवाहिक विवाद में बच्चों को पिता के प्यार से दूर नहीं किया जा सकता – छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट

बिलासपुर। छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने बच्चों के संरक्षण और पिता के अधिकारों को लेकर एक अहम फैसला सुनाया है। चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा की सिंगल बेंच ने कहा कि वैवाहिक विवादों के चलते बच्चों को पिता के स्नेह और संपर्क से वंचित नहीं किया जा सकता।

हाई कोर्ट ने फैमिली कोर्ट के उस आदेश को सही ठहराया है, जिसमें एक पिता को अपनी 10 वर्षीय बेटी से नियमित रूप से मिलने का अधिकार दिया गया था। पत्नी ने इस आदेश को यह कहते हुए चुनौती दी थी कि वह वर्तमान में कोलकाता में रहती है और बच्ची को रायपुर लाना व्यावहारिक रूप से संभव नहीं है।


🔹 2013 में हुआ था विवाह, 2015 में बेटी का जन्म

रायपुर निवासी दंपती का विवाह 27 अप्रैल 2013 को हिंदू रीति-रिवाजों और बाद में ईसाई परंपरा के अनुसार हुआ था। वर्ष 2015 में उनकी बेटी का जन्म हुआ। पति वर्तमान में भोपाल में रह रहा है।


🔹 पति पर अन्य महिला से संबंध के आरोप

पत्नी की ओर से अदालत को बताया गया कि ससुराल में उसे प्रताड़ित किया जाता था और पति के किसी अन्य महिला से संबंध थे। वर्तमान में वह कोलकाता में रह रही है।

पत्नी का तर्क था कि फैमिली कोर्ट का आदेश लागू होने पर उसे बार-बार बच्ची को लेकर रायपुर या भोपाल आना पड़ेगा, जिससे बच्ची की पढ़ाई और सुविधा प्रभावित होगी।


🔹 2020 में अलगाव, कोर्ट पहुंचे थे पति

पत्नी का कहना है कि शादी के कुछ समय बाद ही विवाद शुरू हो गए थे। जनवरी 2020 में वह ससुराल छोड़कर मायके चली गई और बेटी को भी साथ ले गई। इसके बाद पति ने रायपुर फैमिली कोर्ट में तलाक और बच्ची से मिलने का अधिकार मांगते हुए याचिका दायर की थी।


🔹 हाई कोर्ट का स्पष्ट संदेश

हाई कोर्ट ने स्पष्ट कहा कि

बच्चे का सर्वांगीण विकास माता-पिता दोनों के स्नेह से होता है। वैवाहिक विवाद बच्चों को पिता के प्यार से दूर रखने का आधार नहीं बन सकता।

अदालत ने फैमिली कोर्ट के आदेश को बरकरार रखते हुए पत्नी की याचिका खारिज कर दी।