January 17, 2026

पटवारी सच्चिदानंद साहू के खिलाफ विभागीय जांच पर हाईकोर्ट की रोक, राज्य शासन समेत अफसरों को नोटिस

बिलासपुर। रायगढ़ जिले की तहसील पुसौर में पदस्थ रहे पटवारी सच्चिदानंद साहू के विरुद्ध विभागीय जांच शुरू करने के आदेश पर छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने रोक लगा दी है। साथ ही न्यायालय ने राज्य शासन, सचिव बोर्ड ऑफ रेवेन्यू, आयुक्त राजस्व बिलासपुर संभाग, कलेक्टर रायगढ़, अनुविभागीय अधिकारी राजस्व रायगढ़ और तहसीलदार पुसौर को नोटिस जारी कर जवाब तलब किया है।

यह मामला छत्तीसगढ़ बोर्ड ऑफ रेवेन्यू, बिलासपुर द्वारा पारित आदेश दिनांक 21 अगस्त 2025 से जुड़ा है। आदेश के पैरा-08 में बोर्ड ऑफ रेवेन्यू ने पटवारी सच्चिदानंद साहू के विरुद्ध प्रतिकूल टिप्पणी करते हुए विभागीय एवं प्रशासनिक कार्रवाई प्रारंभ करने के निर्देश दिए थे। साथ ही राज्य के मुख्य सचिव को भी कार्रवाई सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए थे।

क्या है पूरा मामला

सच्चिदानंद साहू की नियुक्ति 02 नवंबर 2015 को पटवारी के पद पर हुई थी और वे तहसील पुसौर, जिला रायगढ़ में पदस्थ थे। शासकीय दायित्वों के तहत उन्होंने 12 अक्टूबर 2020 को पंचनामा तैयार किया और 26 अक्टूबर 2020 को जांच प्रतिवेदन प्रस्तुत किया। यह प्रतिवेदन ग्राम पुसौर स्थित खसरा नंबर 162 बी, रकबा 0.121 हेक्टेयर से संबंधित था, जिसे स्थल निरीक्षण के बाद ग्राम कोटवार और ग्रामीणों की उपस्थिति में तैयार किया गया था।

इसी प्रतिवेदन के आधार पर 28 अक्टूबर 2020 को तहसीलदार पुसौर द्वारा नामांतरण आदेश पारित किया गया। बाद में उक्त भूमि को लेकर पक्षकारों के बीच दीवानी और राजस्व विवाद उत्पन्न हुआ, जो सिविल न्यायालय, एसडीओ राजस्व, अतिरिक्त आयुक्त और अंततः बोर्ड ऑफ रेवेन्यू तक पहुंचा।

जहां तहसीलदार और एसडीओ ने नामांतरण को उचित ठहराया, वहीं अतिरिक्त आयुक्त और बोर्ड ऑफ रेवेन्यू ने भिन्न दृष्टिकोण अपनाते हुए न केवल पूर्व आदेशों को निरस्त किया, बल्कि पटवारी और तहसीलदार के विरुद्ध कठोर टिप्पणियां करते हुए विभागीय जांच के निर्देश भी जारी कर दिए।

हाईकोर्ट में चुनौती

बोर्ड ऑफ रेवेन्यू के आदेश से आहत होकर सच्चिदानंद साहू ने अधिवक्ता मतीन सिद्दीकी और सिबाशिष मिश्रा के माध्यम से हाईकोर्ट में रिट याचिका दायर की। मामले की सुनवाई 06 जनवरी 2026 को न्यायमूर्ति पार्थ प्रतीम साहू के समक्ष हुई।

याचिकाकर्ता की ओर से तर्क दिया गया कि बिना सुनवाई का अवसर दिए और प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों का उल्लंघन करते हुए प्रतिकूल टिप्पणियां एवं विभागीय जांच के निर्देश देना कानूनन गलत है। यह भी कहा गया कि बोर्ड ऑफ रेवेन्यू को पुनरीक्षण अधिकार क्षेत्र में रहते हुए इस प्रकार की कार्रवाई करने का अधिकार नहीं है।

अंतरिम राहत

प्रथम दृष्टया तर्कों से संतुष्ट होते हुए हाईकोर्ट ने बोर्ड ऑफ रेवेन्यू के 21 अगस्त 2025 के आदेश के उस हिस्से पर रोक लगा दी है, जिसमें सच्चिदानंद साहू के विरुद्ध विभागीय जांच प्रारंभ करने के निर्देश दिए गए थे। साथ ही सभी संबंधित पक्षों को नोटिस जारी कर जवाब दाखिल करने के निर्देश दिए गए हैं।