बिलासपुर। प्रदेश की शराब फैक्ट्रियों से निकल रहे कथित जहरीले अपशिष्ट और उससे हो रहे प्रदूषण के मामले में छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है। मुख्य न्यायाधीश रमेश सिन्हा की अध्यक्षता वाली डिवीजन बेंच ने मामले की सुनवाई करते हुए वास्तविक स्थिति का पता लगाने के लिए दो अधिवक्ताओं को कोर्ट कमिश्नर नियुक्त किया है।
हाईकोर्ट के निर्देशानुसार दोनों कोर्ट कमिश्नर प्रदेश की तीन शराब डिस्टलरी यूनिट्स का संयुक्त निरीक्षण करेंगे और अपनी विस्तृत रिपोर्ट 30 दिनों के भीतर न्यायालय में प्रस्तुत करेंगे। मामले की अगली सुनवाई 6 जुलाई को निर्धारित की गई है।
गौरतलब है कि हाईकोर्ट ने इस मामले में मीडिया में प्रकाशित खबरों का स्वतः संज्ञान लिया था। विशेष रूप से बिलासपुर क्षेत्र में शिवनाथ नदी में प्रदूषण के कारण बड़ी संख्या में मछलियों के मरने की घटना को गंभीरता से लेते हुए न्यायालय ने संबंधित विभागों से जवाब तलब किया था।
न्यायालय अब निरीक्षण रिपोर्ट के आधार पर यह तय करेगा कि डिस्टलरी इकाइयों से निकलने वाले अपशिष्ट का पर्यावरण पर कितना प्रभाव पड़ रहा है और प्रदूषण नियंत्रण के लिए क्या कदम उठाए जाने आवश्यक हैं।





