बिलासपुर। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने नाबालिग बच्ची से दुष्कर्म और अप्राकृतिक कृत्य के मामले में बड़ा फैसला सुनाते हुए दोषी सौतेले पिता की उम्रकैद की सजा को बरकरार रखा है। हाईकोर्ट ने कहा कि यदि पीड़िता की गवाही भरोसेमंद और सुसंगत हो, तो केवल उसके बयान के आधार पर भी आरोपी को दोषी ठहराया जा सकता है।
चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा और जस्टिस रविन्द्र कुमार अग्रवाल की डिवीजन बेंच ने आरोपी की अपील खारिज कर दी। आरोपी ने ट्रायल कोर्ट के उस फैसले को चुनौती दी थी, जिसमें उसे पॉक्सो एक्ट और आईपीसी की गंभीर धाराओं के तहत उम्रकैद की सजा सुनाई गई थी।
सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने पाया कि पीड़िता ने अपने बयान में लगातार एक जैसी बात कही और लंबी जिरह के बावजूद उसके बयान में कोई बड़ा विरोधाभास सामने नहीं आया। अदालत ने माना कि बच्ची ने डर और धमकी की वजह से घटना को लंबे समय तक छिपाकर रखा था।
कोर्ट ने कहा कि चाइल्ड लाइन टीम के संपर्क में आने के बाद पीड़िता ने पूरी घटना की जानकारी दी। अदालत ने माना कि पीड़िता की गवाही विश्वसनीय और भरोसेमंद है, इसलिए आरोपी के खिलाफ दोष सिद्ध करने के लिए यह पर्याप्त है।
हाईकोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि बच्चों के साथ यौन अपराध बेहद गंभीर प्रकृति के अपराध हैं और ऐसे मामलों में किसी प्रकार की नरमी नहीं बरती जा सकती।
अदालत ने आरोपी की जमानत भी निरस्त कर दी और उसे चार सप्ताह के भीतर सरेंडर करने का निर्देश दिया है।





