January 16, 2026

छत्तीसगढ़ में MSP पर धान खरीदी के आंकड़े संदिग्ध, उत्पादन से ज्यादा खरीदी ने खड़े किए सवाल

रायपुर। छत्तीसगढ़ में समर्थन मूल्य (MSP) पर धान खरीदी के आंकड़े एक बार फिर सवालों के घेरे में आ गए हैं। सरकारी रिकॉर्ड के मुताबिक राज्य में जितनी धान की खेती होती है, उससे कहीं अधिक मात्रा में धान की खरीदी की जा रही है। उत्पादन और खरीदी के बीच बढ़ता अंतर अब एक संगठित तंत्रगत गड़बड़ी की ओर इशारा कर रहा है।

उत्पादन आकलन की प्रक्रिया के बावजूद बढ़ रही खरीदी

कृषि विभाग के अनुसार धान उत्पादन का आकलन गिरदावरी, मोबाइल फोटोग्राफी और राजस्व अमले की रिपोर्ट के आधार पर किया जाता है। इसके बावजूद हर वर्ष सरकारी खरीदी के आंकड़े वास्तविक उत्पादन से आगे निकल जाते हैं। जानकारों का कहना है कि कई इलाकों में बिना धान की खेती किए खेतों को धान उत्पादक दर्शा दिया जाता है।

पटवारी से लेकर मिलर्स तक की भूमिका संदिग्ध

सूत्रों के मुताबिक इस पूरी प्रक्रिया में पटवारी, धान खरीदी केंद्रों के कर्मचारी और कुछ राइस मिलर्स की भूमिका संदिग्ध बताई जाती है। आरोप है कि कागजों में खेती दिखाकर धान बेचने के लिए किसानों का पंजीयन कर दिया जाता है, जबकि जमीन पर वास्तविक उत्पादन होता ही नहीं।
कुछ मामलों में किसानों को यह तक जानकारी नहीं होती कि उनके नाम पर धान की बिक्री दर्ज कर दी गई है।

पड़ोसी राज्यों से धान खपाने की शिकायतें

इतना ही नहीं, पड़ोसी राज्यों से धान लाकर उसे छत्तीसगढ़ की MSP खरीदी व्यवस्था में खपाने की शिकायतें भी सामने आई हैं। इससे न केवल सरकारी आंकड़े प्रभावित हो रहे हैं, बल्कि राज्य के खजाने पर भी भारी आर्थिक बोझ पड़ रहा है।

जांच में सामने आई गंभीर अनियमितताएं

जांच के दौरान कुछ जिलों के धान खरीदी केंद्रों पर गंभीर गड़बड़ियां उजागर हुई हैं।
एक मामले में रिकॉर्ड में दर्ज हजारों क्विंटल धान गोदामों से गायब पाया गया, जिसकी कीमत करोड़ों रुपये आंकी गई। जांच में फर्जी बिल, मजदूरों की झूठी उपस्थिति और निगरानी व्यवस्था से छेड़छाड़ जैसे तथ्य भी सामने आए हैं।

खरीदी के रिकॉर्ड आंकड़े

सरकारी आंकड़ों के अनुसार, खरीफ विपणन वर्ष 2024-25 में राज्य सरकार ने करीब 149.25 लाख मीट्रिक टन धान की खरीदी की, जो अब तक का सबसे बड़ा आंकड़ा है।
यह 2023-24 में हुई 144.92 लाख मीट्रिक टन की खरीदी से भी अधिक है।

सरकार के मुताबिक इस अभियान में 25,49,592 पंजीकृत किसानों ने धान बेचा और उनके बैंक खातों में करीब ₹31,089 करोड़ की राशि ट्रांसफर की गई। हालांकि, चालू वर्ष की खरीदी का अंतिम आंकड़ा अभी आना बाकी है।

49 लाख मीट्रिक टन धान केवल कागजों में?

कुछ जानकारों का दावा है कि पिछले वर्ष की कुल खरीदी में करीब 49 लाख मीट्रिक टन धान केवल कागजों में जोड़ा गया, जिसका वास्तविक उत्पादन से कोई संबंध नहीं था। इससे सरकारी खर्च पर हजारों करोड़ रुपये का अतिरिक्त भार पड़ा।

विशेषज्ञों की चेतावनी

विशेषज्ञों का कहना है कि MSP योजना और मौजूदा निगरानी तंत्र के बावजूद वास्तविक उत्पादन और खरीदी के आंकड़ों के बीच इतना बड़ा अंतर अब भी स्पष्ट नहीं हो सका है।
उनका मानना है कि यदि उत्पादन के सही आंकड़ों के आधार पर सख्त निगरानी और स्वतंत्र ऑडिट कराया जाए, तो सरकार को अनुमानतः कम से कम ₹10,000 करोड़ की बचत संभव हो सकती थी।