महासमुंद। कबीरधाम जिले के बाद अब महासमुंद के बागबाहरा धान संग्रहण केंद्र में भी भारी गड़बड़ी सामने आई है। यहां 18,433 क्विंटल धान स्टॉक से गायब पाया गया है, जिससे सरकार को करीब 5.71 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ है। हैरानी की बात यह है कि संग्रहण केंद्र के संचालक ने इस कमी के लिए चूहे, दीमक और चिड़ियों को जिम्मेदार ठहराया है।
हालांकि, जानकारों का मानना है कि यह मामला सीधे तौर पर भ्रष्टाचार और लापरवाही से जुड़ा हुआ है। क्योंकि धान के सुरक्षित भंडारण के लिए प्रशासन द्वारा मार्कफेड के माध्यम से करोड़ों रुपये खर्च किए जाते हैं। इसमें परिवहन भाड़ा, हमाली शुल्क और सुरक्षा व्यवस्था से जुड़े उपकरणों का खर्च भी शामिल होता है। ऐसे में प्राकृतिक कारणों को जिम्मेदार बताना जिम्मेदारी से बचने का प्रयास माना जा रहा है।
नियमों के बावजूद कार्रवाई नहीं
संरक्षण विभाग के सचिव द्वारा 12 सितंबर 2025 को जारी पत्र के अनुसार—
- 1% तक कमी पर कारण बताओ नोटिस
- 1% से 2% कमी पर विभागीय जांच
- 2% से अधिक कमी पर तत्काल निलंबन, विभागीय जांच और एफआईआर के निर्देश हैं
इसके बावजूद बागबाहरा संग्रहण केंद्र में 3.65% धान की कमी दर्ज होने के बाद भी अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई है। न प्रशासन ने सख्ती दिखाई और न ही जिम्मेदारों पर कोई दंडात्मक कदम उठाया गया।
उल्लेखनीय है कि हाल ही में कवर्धा जिले में भी करीब 7 करोड़ रुपये के धान की कमी के लिए चूहों को जिम्मेदार ठहराया गया था, जिस पर सवाल उठे थे।
क्या कहते हैं अधिकारी
बागबाहरा धान संग्रहण केंद्र प्रभारी ने बताया कि वर्ष 2024-25 में 12.63 लाख बोरा धान केंद्र में आया था। आवक के समय धान में 17 प्रतिशत नमी थी, जबकि जावक के समय यह 10-11 प्रतिशत रह गई। उनके अनुसार दीमक, कीट, पक्षी और चूहे धान को नुकसान पहुंचाते हैं।
वहीं, डीएमओ (जिला विपणन अधिकारी) ने बताया कि धान की कमी को लेकर संग्रहण केंद्र प्रभारी को नोटिस जारी किया गया है और मामले में नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
अब सवाल यह है कि करोड़ों के नुकसान के बावजूद प्रशासन कब जिम्मेदारों पर ठोस कदम उठाएगा।





