July 23, 2026

नेपाल PM बालेन शाह का बड़ा बयान, बोले- सीमा विवाद पर तथ्यों के आधार पर हो संयुक्त जांच

काठमांडू। नेपाल के प्रधानमंत्री Balen Shah ने भारत-नेपाल सीमा विवाद को लेकर बड़ा बयान दिया है। रविवार को संसद में अपने पहले औपचारिक संबोधन के दौरान उन्होंने कहा कि सीमा संबंधी मुद्दों पर यह कहना उचित नहीं होगा कि किसी एक पक्ष ने दूसरे की भूमि पर कब्जा किया है। उन्होंने जोर देकर कहा कि दोनों देशों को ऐतिहासिक तथ्यों और प्रमाणों के आधार पर संयुक्त रूप से निष्पक्ष जांच करनी चाहिए।

काठमांडू पोस्ट की रिपोर्ट के अनुसार, प्रधानमंत्री शाह ने कहा कि पदभार संभालने के बाद उन्हें सीमा विवाद से जुड़े कुछ ऐसे तथ्यों की जानकारी मिली है, जिनकी गहन पड़ताल आवश्यक है। उन्होंने कहा कि इस विषय पर जल्दबाजी में निष्कर्ष निकालने के बजाय तथ्यों के आधार पर समाधान तलाशा जाना चाहिए।

प्रधानमंत्री के इस बयान पर विपक्षी दलों ने कड़ी आपत्ति जताई है। Nepali Congress और Communist Party of Nepal के कई सांसदों ने मांग की कि इस बयान को संसद की कार्यवाही से हटाया जाए। विपक्ष का कहना है कि यदि प्रधानमंत्री के पास अपने दावे के समर्थन में कोई ठोस प्रमाण हैं तो उन्हें सार्वजनिक किया जाए, अन्यथा बयान वापस लिया जाए।

संसद में भारत और चीन के बीच लिपुलेख तथा लिम्पियाधुरा मार्ग से होने वाले व्यापार को लेकर पूछे गए सवाल के जवाब में शाह ने कहा कि नेपाल सीमा विवाद का समाधान संवाद और कूटनीतिक प्रक्रिया के माध्यम से चाहता है। उन्होंने बताया कि नेपाल इस मुद्दे पर पहले ही भारत को राजनयिक नोट भेज चुका है और भारत की ओर से जवाब भी प्राप्त हो चुका है।

प्रधानमंत्री ने बताया कि भारत की ओर से दोनों देशों के इतिहासकारों, सर्वेक्षण विशेषज्ञों और स्थानीय जानकारों की संयुक्त टीम गठित करने का प्रस्ताव दिया गया है, ताकि उपलब्ध तथ्यों और दस्तावेजों के आधार पर विवाद का समाधान खोजा जा सके।

शाह ने यह भी कहा कि नेपाल ने इस विषय पर केवल भारत और चीन से ही नहीं, बल्कि United Kingdom से भी चर्चा की है। उनका मानना है कि सीमा विवाद का संबंध ब्रिटिश काल में तैयार किए गए नक्शों और व्यवस्थाओं से है, इसलिए इस मामले में ब्रिटेन की ऐतिहासिक भूमिका को भी ध्यान में रखा जाना चाहिए।

गौरतलब है कि लिपुलेख, लिम्पियाधुरा और कालापानी क्षेत्र लंबे समय से भारत और नेपाल के बीच विवाद का विषय रहे हैं। वर्ष 2020 में नेपाल की संसद ने एक नया राजनीतिक नक्शा पारित किया था, जिसमें इन क्षेत्रों को नेपाल का हिस्सा दिखाया गया था। भारत ने उस समय इस दावे को खारिज करते हुए कहा था कि यह ऐतिहासिक तथ्यों और प्रमाणों पर आधारित नहीं है।

प्रधानमंत्री के बयान पर बढ़ते विवाद के बीच नेपाल के विदेश मंत्रालय ने सफाई जारी करते हुए कहा कि उनका आशय भारत की भूमि पर नेपाल के कब्जे से नहीं था, बल्कि सीमा क्षेत्रों में मौजूद “क्रॉस बॉर्डर ऑक्युपेशन” और “दसगजा” से जुड़ी समस्याओं की ओर ध्यान आकर्षित करना था।

उल्लेखनीय है कि मार्च 2026 में प्रधानमंत्री बनने के बाद संसद में शाह का यह पहला औपचारिक संबोधन था। ऐसे समय में दिया गया यह बयान महत्वपूर्ण माना जा रहा है, जब भारत और नेपाल के संबंधों में सीमा और रणनीतिक मुद्दों को लेकर नई संवेदनशीलताएं उभर रही हैं।