नई दिल्ली। भारत और पाकिस्तान के बीच आधिकारिक स्तर पर बातचीत भले ही फिलहाल रुकी हुई हो, लेकिन दोनों देशों के बीच तनाव कम करने के उद्देश्य से अनौपचारिक कूटनीतिक संवाद यानी ‘ट्रैक-2 डिप्लोमेसी’ का नया दौर शुरू हो गया है। इस सप्ताह श्रीलंका की राजधानी कोलंबो और थाईलैंड की राजधानी बैंकॉक में दोनों देशों के प्रतिनिधियों के बीच कई दौर की बैठकें आयोजित की गईं।
जानकारी के अनुसार, अब तक दोनों पक्षों के अधिकारियों, पूर्व राजनयिकों और सेवानिवृत्त सैन्य अधिकारियों के बीच तीन से चार बैठकें हो चुकी हैं। इन बैठकों में आतंकवाद, जल विवाद और द्विपक्षीय संबंधों से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर विस्तार से चर्चा की गई।
बैठक के दौरान दोनों पक्षों ने आपसी सूचनाओं का आदान-प्रदान किया और इस बात पर भी विचार किया कि ट्रैक-2 वार्ता से प्राप्त सुझावों और निष्कर्षों को औपचारिक ‘ट्रैक-1’ कूटनीतिक चैनलों तक किस प्रकार पहुंचाया जा सकता है, ताकि भविष्य में सरकारी स्तर पर बातचीत का मार्ग प्रशस्त हो सके।
क्या है ट्रैक-1 और ट्रैक-2 कूटनीति?
ट्रैक-1 कूटनीति वह औपचारिक बातचीत होती है, जिसमें दोनों देशों की सरकारों के अधिकृत प्रतिनिधि सीधे भाग लेते हैं। इसके विपरीत ट्रैक-2 कूटनीति अनौपचारिक संवाद की प्रक्रिया है, जिसमें पूर्व राजनयिक, सेवानिवृत्त सैन्य अधिकारी, नीति विशेषज्ञ और शिक्षाविद शामिल होते हैं। इसका उद्देश्य दोनों देशों के बीच विश्वास बहाल करना, तनाव कम करना और भविष्य में औपचारिक वार्ता के लिए अनुकूल माहौल तैयार करना होता है।
रिपोर्टों के मुताबिक, हालिया बैठकों का मुख्य उद्देश्य दोनों देशों के बीच संवाद बनाए रखना और क्षेत्रीय तनाव को कम करने के लिए संभावित उपायों पर चर्चा करना था। हालांकि, इस संबंध में भारत और पाकिस्तान की ओर से कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है।





