रायपुर। छत्तीसगढ़ कैडर के 2011 बैच के आईपीएस अधिकारी संतोष सिंह को केंद्रीय प्रतिनियुक्ति पर भेजा गया है। उन्हें केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (CISF) में डीआईजी के पद पर डेपुटेशन मिला है। वर्तमान में संतोष सिंह पुलिस मुख्यालय में डीआईजी सीसीटीएनएस/एससीआरबी के पद पर पदस्थ हैं।
गृह मंत्रालय ने उनकी प्रतिनियुक्ति को मंजूरी देते हुए आदेश जारी कर दिया है। अंडर सेक्रेटरी संजीव कुमार द्वारा जारी पत्र में छत्तीसगढ़ के मुख्य सचिव को निर्देश दिया गया है कि आईपीएस संतोष सिंह को तत्काल नई जिम्मेदारी संभालने के लिए रिलीव किया जाए।
आईपीएस संतोष सिंह अवैध नशे के खिलाफ चलाए गए अपने ‘निजात’ अभियान के लिए देश और विदेश में चर्चा में रहे हैं। इस अभियान के लिए उन्हें अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इंटरनेशनल एसोसिएशन ऑफ चीफ्स ऑफ पुलिस (IACP) अवार्ड से भी सम्मानित किया जा चुका है।

क्या है CISF
केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (CISF) देश की प्रमुख केंद्रीय सुरक्षा एजेंसियों में से एक है। यह औद्योगिक संस्थानों, हवाई अड्डों, परमाणु संयंत्रों, सरकारी इमारतों और संसद भवन की सुरक्षा का जिम्मा संभालता है। वर्ष 1968 में स्थापित इस अर्धसैनिक बल की शुरुआत 3,129 कर्मियों के साथ हुई थी, जो अब बढ़कर करीब 2.20 लाख जवानों की मजबूत ताकत बन चुका है।
वर्तमान में CISF देशभर के 361 महत्वपूर्ण प्रतिष्ठानों और 70 हवाई अड्डों की सुरक्षा कर रहा है। हाल ही में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने घोषणा की है कि देश के प्रमुख बंदरगाहों की सुरक्षा की जिम्मेदारी भी CISF को सौंपी जाएगी।
जानिए कौन हैं IPS संतोष सिंह
आईपीएस संतोष सिंह 2011 बैच के अधिकारी हैं और मूल रूप से उत्तर प्रदेश के गाजीपुर जिले के निवासी हैं। उनके पिता अशोक सिंह पेशे से पत्रकार हैं।
उन्होंने बनारस हिंदू विश्वविद्यालय (BHU) से राजनीति शास्त्र में बीए और एमए किया है। ग्रेजुएशन में यूनिवर्सिटी टॉपर और पोस्ट ग्रेजुएशन में गोल्ड मेडलिस्ट रहे हैं। उन्होंने यूजीसी नेट-जेआरएफ भी उत्तीर्ण किया है। इसके बाद जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU) से अंतरराष्ट्रीय संबंध विषय में एमफिल किया और दुर्ग विश्वविद्यालय से संयुक्त राष्ट्र के शांति निर्माण कार्यों पर पीएचडी की है।
संतोष सिंह छत्तीसगढ़ के रायपुर, बिलासपुर, कोरबा, राजनांदगांव, कोरिया, रायगढ़, महासमुंद, नारायणपुर और कोंडागांव जिलों में एसपी और एसएसपी के रूप में सेवाएं दे चुके हैं। इसके अलावा सुकमा में एएसपी और दुर्ग में सीएसपी के पद पर भी कार्य कर चुके हैं।
सामुदायिक पुलिसिंग में उनकी विशेष रुचि रही है। नक्सल प्रभावित जिलों में पदस्थापना के दौरान उन्होंने कई नक्सलियों के आत्मसमर्पण, गिरफ्तारी और मुठभेड़ों में अहम भूमिका निभाई।
महासमुंद जिले में बाल हितैषी पुलिसिंग के लिए उन्हें उपराष्ट्रपति द्वारा ‘चैंपियंस ऑफ चेंज’ अवार्ड मिला। रायगढ़ जिले में ‘संवेदना’ अभियान के लिए फिक्की स्मार्ट पुलिसिंग अवार्ड और इंडिया पुलिस अवार्ड से सम्मानित किया गया।
इसके अलावा नशा विरोधी ‘निजात’ अभियान के लिए अमेरिका की प्रतिष्ठित संस्था इंटरनेशनल एसोसिएशन ऑफ चीफ्स ऑफ पुलिस (IACP) ने उन्हें सम्मानित किया है। गृह मंत्रालय के बीपीआरएंडडी ने भी इस अभियान को देश के 30 सर्वश्रेष्ठ स्मार्ट पुलिसिंग कार्यों में शामिल किया है।
उनके कार्यकाल में रायगढ़ में एक दिन में 12.37 लाख मास्क वितरण का विश्व रिकॉर्ड बना, जबकि महासमुंद में सर्वाधिक बच्चों को सेल्फ डिफेंस प्रशिक्षण देने का भी रिकॉर्ड दर्ज किया गया।





