तनाव का असर, गैस सिलेंडर के लिए लंबी कतारें
रायपुर। अमेरिका-इजराइल और ईरान के बीच बढ़ते तनाव का असर अब देशभर में दिखाई देने लगा है। छत्तीसगढ़ समेत कई राज्यों में एलपीजी गैस सिलेंडर की कमी से लोग परेशान हैं। गैस एजेंसियों के बाहर उपभोक्ताओं की लंबी कतारें लग रही हैं और सिलेंडर मिलने में देरी हो रही है।
गैस कंपनियों ने तय किया सप्लाई कोटा
रायपुर। सूत्रों के अनुसार गैस एजेंसियों को मिलने वाली सप्लाई पर कंपनियों ने फिलहाल कोटा तय कर दिया है। औसतन किसी एजेंसी की मासिक बिक्री करीब 10 हजार सिलेंडर होती है, लेकिन वर्तमान में उन्हें लगभग 20 से 25 प्रतिशत कम सप्लाई दी जा रही है। यानी जहां पहले 10 हजार सिलेंडर की आपूर्ति होती थी, वहां अब करीब 7500 सिलेंडर ही उपलब्ध कराए जा रहे हैं।
तय कोटे से ज्यादा सप्लाई संभव नहीं
रायपुर। कंपनियों की ओर से स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं कि फिलहाल तय कोटे से ज्यादा सिलेंडर की आपूर्ति संभव नहीं है। अगर किसी क्षेत्र में अतिरिक्त सप्लाई दी भी जाती है तो उसे एजेंसी की अगली मासिक आपूर्ति से समायोजित किया जाएगा। इससे डिस्ट्रीब्यूटर्स और एजेंसियों के सामने सप्लाई प्रबंधन की चुनौती बढ़ गई है।
मांग ज्यादा, सप्लाई कम
रायपुर। कई डिस्ट्रीब्यूशन पॉइंट्स पर मांग और सप्लाई के बीच बड़ा अंतर देखने को मिल रहा है। जहां रोजाना करीब 2500 सिलेंडर की मांग आ रही है, वहां फिलहाल करीब 500 सिलेंडर प्रतिदिन की ही आपूर्ति हो पा रही है। इसके कारण उपभोक्ताओं को गैस सिलेंडर मिलने में औसतन 5 दिन तक का इंतजार करना पड़ रहा है।
5 से 6 दिन का बैकलॉग बना
रायपुर। सीमित सप्लाई के कारण कई जगहों पर 5 से 6 दिन तक का बैकलॉग बन चुका है। इससे घरेलू उपभोक्ताओं को समय पर सिलेंडर नहीं मिल पा रहा है और एजेंसियों पर दबाव बढ़ गया है।
आवश्यक सेवाओं को दी जा रही प्राथमिकता
रायपुर। इस बीच स्कूल, अस्पताल, धार्मिक संस्थान, सीआरपीएफ कैंटीन और सेना जैसे आवश्यक संस्थानों को गैस सप्लाई में प्राथमिकता दी जा रही है। इसके कारण सामान्य घरेलू उपभोक्ताओं को सिलेंडर के लिए थोड़ा अधिक इंतजार करना पड़ सकता है।
स्थिति सामान्य होने में लग सकता है समय
रायपुर। रविवार को देशभर के एलपीजी बॉटलिंग प्लांट बंद रहने से सप्लाई पर अतिरिक्त दबाव पड़ने की आशंका जताई जा रही है। हालांकि सरकार और गैस कंपनियां स्थिति को संतुलित रखने की कोशिश कर रही हैं, लेकिन सीमित सप्लाई और बढ़ती मांग के कारण फिलहाल जमीनी स्तर पर दबाव की स्थिति बनी हुई है।





