जगदलपुर। बुखार, दर्द और उल्टी मलेरिया के सामान्य लक्षण माने जाते थे, लेकिन अब मलेरिया ने अपना स्वरूप बदल लिया है। विशेषज्ञों का कहना है कि बुखार के साथ दस्त यानी डायरिया भी मलेरिया का बड़ा संकेत हो सकता है।
बस्तर जिले में मलेरिया को लेकर नई जानकारी सामने आई है। डिमरापाल स्थित मेकॉज के ऑडिटोरियम में आयोजित मलेरिया अपडेट-2026 संगोष्ठी में देशभर से आए विशेषज्ञों ने बताया कि अब असिम्प्टोमैटिक मलेरिया, यानी बिना स्पष्ट लक्षण वाला मलेरिया, सबसे ज्यादा खतरनाक हो रहा है। समय पर इलाज न मिलने पर यह स्थिति गंभीर हो सकती है।
विशेषज्ञों ने कहा कि बदलते रहन-सहन और वातावरण के कारण मलेरिया के पैरासाइट भी अपनी प्रकृति बदल रहे हैं। अब कमजोरी, हल्का सिरदर्द और दस्त जैसे लक्षण दिखने पर भी मलेरिया की जांच कराना जरूरी माना जा रहा है।
डॉक्टरों ने चेतावनी दी कि बेहोशी, दौरा, अत्यधिक कमजोरी, गंभीर एनीमिया, किडनी फेलियर या सांस लेने में परेशानी जैसी स्थिति में कॉम्प्लीकेटेड मलेरिया का खतरा होता है और मरीज को तुरंत अस्पताल में भर्ती कर आर्टीसुनेट इंजेक्शन सहित आपात उपचार देना जरूरी है।
राहत की बात यह है कि बस्तर में मलेरिया नियंत्रण अभियान सफल रहा है। वर्ष 2017 में 8.85 लाख आबादी में 13 हजार से ज्यादा मरीज और 22 मौतें हुई थीं, जबकि वर्ष 2025 तक मरीजों की संख्या घटकर 2,887 रह गई। पिछले वर्ष पूरे जिले में मलेरिया से एक भी मौत दर्ज नहीं हुई। स्वास्थ्य विभाग इसे मलेरिया नियंत्रण की बड़ी सफलता मान रहा है, लेकिन विशेषज्ञों का कहना है कि बदले हुए लक्षणों को पहचानना अब पहले से अधिक जरूरी हो गया है।





