Jagdalpur Latest News: बस्तर संभाग में परंपरा, आस्था, संघर्ष, आंदोलन और प्रशासन से जुड़ी कई अहम खबरें सामने आई हैं। कहीं दशगात्र में आत्मा के लिए हाट लगता है, तो कहीं 600 श्रद्धालुओं की आस्था से स्वर्ण कलश बना। वहीं मेड़ारम मेले में लाखों श्रद्धालु उमड़े, बस्तर पंडुम से लोककला को पहचान मिली और फरसगांव में किसानों ने चक्काजाम किया। पढ़िए बस्तर की बड़ी खबरें…
🕯️ मृत्यु के बाद भी रिश्ता निभाता बस्तर, दशगात्र में आत्मा के लिए सजता है हाट
बस्तर की जनजातीय संस्कृति में मृत्यु को अंत नहीं बल्कि नए रिश्ते की शुरुआत माना जाता है। मान्यता है कि परिजन की मृत्यु के बाद आत्मा पितरों में शामिल होती है। दशगात्र की रात आत्मा की तृप्ति के लिए घर के पास चौक में विशेष हाट बाजार लगाया जाता है।
इस हाट में चना-मुर्रा, मिठाइयां, रुमाल से लेकर महुआ शराब तक सजाई जाती है। रिश्तेदार ही खरीदार बनते हैं लेकिन उद्देश्य आत्मा की संतुष्टि होता है। हल्बा और भतरा समाज की यह परंपरा पीढ़ियों से चली आ रही है। समाज मानता है कि अतृप्त आत्मा परिवार को परेशान कर सकती है, इसलिए पूरे सम्मान से यह आयोजन किया जाता है।
🛕 600 श्रद्धालुओं की आस्था से बना एक किलो स्वर्ण कलश, 29 को होगा महाभिषेक
जगदलपुर के श्री बालाजी मंदिर में श्रद्धा ने ऐतिहासिक रूप ले लिया है। करीब 600 श्रद्धालुओं ने अपनी सामर्थ्य अनुसार सोना दान किया, जिससे लगभग एक किलो वजनी स्वर्ण कलश तैयार हुआ।
29 जनवरी को इसी कलश से भगवान का महा-अभिषेक किया जाएगा। पहली बार इस कलश का उपयोग होगा। मंत्रोच्चार और शंख ध्वनि के बीच कलश का शुद्धिकरण किया गया। ट्रस्ट के अनुसार यह आयोजन केवल अनुष्ठान नहीं बल्कि भक्तों की सामूहिक आस्था और समर्पण का प्रतीक है।
🌳 जंगल, श्रद्धा और देवी: मेड़ारम मेले में उमड़ा आस्था का सैलाब
तेलंगाना के मुलुगु जिले में स्थित मेड़ारम मेला शुरू हो गया है। तीन दिनों में करीब डेढ़ करोड़ श्रद्धालुओं के पहुंचने का अनुमान है। यह मेला हर तीसरे वर्ष आयोजित होता है।
माता सम्मक्का और सरलम्मा को गुड़ अर्पित किया जाता है। यहां मूर्तियों के बजाय बांस, हल्दी और सिंदूर से पूजा होती है। देवियों को जंगल से लाकर पूजा स्थल तक लाया जाता है। श्रद्धालु पहाड़ियों और जंगलों से पैदल यात्रा कर पहुंचते हैं। सरकार ने 4000 बसें और हेलीकॉप्टर सेवा सहित व्यापक इंतजाम किए हैं।
🎭 बस्तर पंडुम से लोककला को वैश्विक पहचान
जगदलपुर में बस्तर पंडुम का भव्य शुभारंभ हुआ। इस बार 5 हजार से अधिक कलाकारों ने पंजीयन कराया। कई प्रतिभागियों को पहली बार बड़ा मंच मिला।
आयुक्त ने बताया कि यह आयोजन सांस्कृतिक उत्सव के साथ विकास का माध्यम भी है। प्रतिभागी अब संभाग स्तरीय मंच पर अपनी कला दिखाएंगे और देश-विदेश के कलाकारों से सीखेंगे। इसी मंच से ‘संपूर्णता अभियान’ की शुरुआत भी की गई, जिसमें स्वास्थ्य, शिक्षा और रोजगार को जोड़ा गया है।
🥋 संघर्ष से सफलता तक: योगिता मण्डावी बनीं प्रेरणा
कोंडागांव की योगिता मण्डावी मात्र 14 वर्ष की उम्र में राष्ट्रीय स्तर की जूडो खिलाड़ी बन चुकी हैं। चार वर्ष की उम्र में माता-पिता को खोने के बाद बालगृह में रहते हुए उन्होंने खेल को जीवन का सहारा बनाया।
10 साल की उम्र में जूडो शुरू कर राज्य, क्षेत्रीय और राष्ट्रीय स्तर पर कई पदक जीते। वर्तमान में भोपाल में विशेष प्रशिक्षण ले रही योगिता हजारों बच्चों के लिए प्रेरणा बन गई हैं।
🚜 भुगतान नहीं मिला तो किसान उतरे सड़क पर, NH-30 पर चक्काजाम
फरसगांव में सहकारी बैंक से भुगतान नहीं मिलने पर किसानों ने नेशनल हाईवे-30 पर चक्काजाम किया। आधे घंटे तक दोनों ओर वाहनों की कतार लग गई।
किसानों का कहना है कि समय पर धान की राशि नहीं मिल रही। अधिकारियों के आश्वासन के बाद आंदोलन समाप्त हुआ। प्रशासन ने जल्द समाधान का भरोसा दिलाया है।
🚑 तेज रफ्तार बाइक की टक्कर से युवक गंभीर, दोनों पैर टूटे
कोंटा के अंबेडकर चौक के पास तेज रफ्तार बाइक ने पैदल युवक को टक्कर मार दी। हादसे में युवक के दोनों पैर टूट गए। बाइक पर तीन युवक सवार थे। एक मौके से फरार बताया जा रहा है। पुलिस जांच में जुटी है।
🐕 आवारा कुत्तों से बढ़ता खतरा, शहर में डर का माहौल
जगदलपुर में आवारा कुत्तों की संख्या बढ़ने से लोग दहशत में हैं। तीन वर्षों में काटने के मामलों में करीब 36% बढ़ोतरी हुई है।
स्वास्थ्य विभाग इलाज का दावा कर रहा है जबकि आयोग ने निकायों को नसबंदी के निर्देश दिए हैं। सुप्रीम कोर्ट भी इसे गंभीर मुद्दा मान चुका है। नगर निकायों पर अब जिम्मेदारी तय की जा रही है।
🏫 जर्जर स्कूल में खुले आसमान के नीचे पढ़ने को मजबूर बच्चे
मर्दापाल ब्लॉक के बेड़मा गांव में प्राथमिक शाला की हालत बेहद खराब है। 24 बच्चे बिना छत जमीन पर बैठकर पढ़ रहे हैं।
न मरम्मत हुई, न वैकल्पिक व्यवस्था। ग्रामीणों ने प्रशासन से तत्काल सुरक्षित भवन की मांग की है। यदि समाधान नहीं हुआ तो आंदोलन की चेतावनी दी गई है।





