जगदलपुर, 6 फरवरी 2026: शहीद गुंडाधुर कृषि महाविद्यालय एवं अनुसंधान केंद्र, जगदलपुर ने पराली जलाने की समस्या और पशुचारे की कमी का वैज्ञानिक समाधान प्रस्तुत किया है। महाविद्यालय ने किसानों से अपील की है कि वे खेतों में पराली जलाने के बजाय उसका यूरिया उपचार कर उसे पशुओं के लिए पौष्टिक आहार में बदलें।
महाविद्यालय के अधिष्ठाता डॉ. आर.एस. नेताम के निर्देशानुसार, ग्रामीण कृषि कार्य अनुभव रावे कार्यक्रम के तहत कृषि छात्रों को पैरा यूरिया उपचार की व्यावहारिक ट्रेनिंग दी गई। सहायक प्राध्यापक डॉ. नीता मिश्रा ने छात्रों को इस प्रक्रिया का जीवंत प्रदर्शन कर दिखाया।
इस विधि के तहत एक क्विंटल कुट्टी किए हुए पैरे पर चार प्रतिशत यूरिया का घोल परत-दर-परत छिड़काव किया जाता है और तीन सप्ताह के लिए वायुरहित स्थिति में दबाकर रखा जाता है। तीन सप्ताह बाद इसे हवा में सुखाकर पशुओं को खिलाया जाता है। वैज्ञानिकों के अनुसार, साधारण पैरे में सिलिका और ऑक्सालेट जैसे तत्व होने के कारण पशुओं को पर्याप्त पोषण और कैल्शियम नहीं मिलता, लेकिन यूरिया उपचारित पैरे में प्रोटीन की मात्रा छह से आठ प्रतिशत तक बढ़ जाती है, जिससे चारा सुपाच्य बनता है।
महाविद्यालय ने बताया कि इस प्रक्रिया को अपनाने से न केवल पशुओं का स्वास्थ्य बेहतर होता है और दुग्ध उत्पादन में वृद्धि होती है, बल्कि यह किसानों के लिए एक सस्ता और सरल उपाय भी है। प्रबंधन ने क्षेत्र के सभी किसानों से आग्रह किया है कि वे चारा संरक्षण की इस तकनीक को अपनाएं और किसी भी तकनीकी सहायता के लिए कृषि महाविद्यालय या नजदीकी पशु चिकित्सक से संपर्क करें।




