June 9, 2026

जल जीवन मिशन फेल: गौरेला में बैगा आदिवासी बूंद-बूंद पानी को तरसे

गौरेला-पेंड्रा-मरवाही जिले के गौरेला विकासखंड अंतर्गत ग्राम पंचायत चुकतीपानी में जल जीवन मिशन के दावों की हकीकत सामने आ गई है। सरकार जहां हर घर नल से जल पहुंचाने का दावा कर रही है, वहीं राष्ट्रपति के दत्तक पुत्र कहे जाने वाले बैगा आदिवासी आज भी पीने के पानी के लिए लंबी दूरी तय करने को मजबूर हैं।

स्थिति की गंभीरता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि मई 2025 में जन चौपाल के दौरान ग्रामीणों ने सीधे मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय से पानी की समस्या की शिकायत की थी। उस समय मुख्यमंत्री ने मौके पर मौजूद अधिकारियों को फटकार लगाते हुए जल्द समाधान के निर्देश दिए थे। हालांकि एक साल बीतने के बाद भी हालात जस के तस बने हुए हैं।

स्थानीय लोगों के अनुसार, चुकतीपानी के बाजारडाड़ क्षेत्र की भौगोलिक स्थिति को नजरअंदाज करते हुए जल स्रोत विकसित किए गए। मैकल पर्वत की तराई में बसे इस इलाके में भूजल स्तर पहले से ही कम है, इसके बावजूद पर्याप्त गहराई तक बोरिंग नहीं की गई। नतीजतन, गर्मी शुरू होते ही जलस्तर नीचे चला गया और नल सूख गए।

ग्रामीणों का कहना है कि एक ही स्थान पर तीन हैंडपंप और बोरिंग कर दी गई, जिससे समस्या और बढ़ गई। अब उन्हें पानी के लिए दूर-दराज के स्रोतों तक जाना पड़ता है। बैगा विकास प्राधिकरण के अध्यक्ष सीताराम बैगा और स्थानीय प्रतिनिधि प्रेमलाल बैगा ने बताया कि पिछले वर्ष अमानानाला से लिफ्ट सिस्टम के जरिए पानी लाने का वादा किया गया था। पाइपलाइन भी बिछाई गई, लेकिन आज तक उसमें पानी नहीं पहुंचा।

भीषण गर्मी के बीच हालात इतने खराब हैं कि इंसानों के साथ-साथ मवेशियों के लिए भी पानी जुटाना मुश्किल हो गया है।

इस मामले में लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी (PHE) विभाग के अधिकारियों का कहना है कि फरवरी 2026 में परियोजना पंचायत को सौंप दी गई है और अब आगे की जिम्मेदारी पंचायत की है। हालांकि विभाग ने यह भी माना है कि मौके पर कुछ कमियां पाई गई हैं, जिन्हें दूर करने का प्रयास किया जा रहा है।

ग्रामीणों का सवाल है कि जब पाइपलाइन और नल में पानी ही नहीं है, तो पंचायत इन व्यवस्थाओं का क्या करेगी। यह स्थिति न केवल योजनाओं की जमीनी सच्चाई उजागर करती है, बल्कि संवेदनशील जनजातीय समुदायों के प्रति प्रशासनिक लापरवाही को भी सामने लाती है।

स्थानीय लोगों ने मांग की है कि तत्काल प्रभाव से गहराई तक बोरिंग, स्थायी जल स्रोत और लिफ्ट सिस्टम को चालू किया जाए, ताकि इस भीषण गर्मी में उन्हें राहत मिल सके।