डोंगरगढ़ |
छत्तीसगढ़ के डोंगरगढ़ स्थित जटकन्हार पोस्ट ऑफिस में सामने आए कथित वित्तीय घोटाले का मामला कई महीने बाद भी पूरी तरह नहीं सुलझ पाया है। सैकड़ों खाताधारकों की जमा पूंजी फंसने के बाद दर्ज 245 शिकायतों में से बड़ी संख्या में मामले अब भी लंबित हैं, जिससे प्रभावित लोगों में नाराजगी बनी हुई है।
फरवरी 2026 में सामने आए इस मामले ने पूरे क्षेत्र में हड़कंप मचा दिया था। आरोप है कि जटकन्हार पोस्ट ऑफिस में पदस्थ तत्कालीन पोस्टमास्टर आशीष मांडवी ने खाताधारकों की जमा राशि में अनियमितता करते हुए लाखों रुपये का गबन किया। मामला उजागर होने के बाद लोगों ने डोंगरगढ़ उप डाकघर का घेराव कर विरोध प्रदर्शन किया था, जिसके बाद डाक विभाग को विशेष शिकायत शिविर आयोजित करना पड़ा।
विभागीय जानकारी के अनुसार, विशेष शिविर में कुल 245 शिकायतें प्राप्त हुई थीं। जांच के बाद विभाग ने 32 लाख रुपये के सेटलमेंट को मंजूरी दी। राजनांदगांव डाक संभाग के हेड पोस्टमास्टर एम.के. शर्मा ने बताया कि स्वीकृत राशि में से लगभग 25 लाख रुपये प्रभावित खाताधारकों को वापस किए जा चुके हैं, जबकि शेष 7 लाख रुपये विभागीय प्रक्रिया के कारण लंबित हैं और जल्द जारी किए जाएंगे।
हालांकि स्थानीय सूत्रों का दावा है कि 245 शिकायतों में से अब तक केवल करीब 100 मामलों का ही निराकरण हो पाया है। बड़ी संख्या में शिकायतें दस्तावेजों के सत्यापन, रिकॉर्ड की कमी और जांच लंबित होने के कारण अभी भी अटकी हुई हैं। इससे प्रभावित खाताधारकों में असंतोष बढ़ता जा रहा है।
मामले का मुख्य आरोपी आशीष मांडवी अब भी फरार है। उसकी गिरफ्तारी के लिए पुलिस ने 5 हजार रुपये का इनाम घोषित किया है। एसडीओपी केसरी नंदन नायक के अनुसार आरोपी की तलाश लगातार जारी है और उसके संभावित ठिकानों पर दबिश दी जा रही है। साथ ही तकनीकी माध्यमों से भी उसकी लोकेशन ट्रेस करने का प्रयास किया जा रहा है।
एसडीओपी ने कहा कि प्रारंभिक रिपोर्ट दर्ज कराने में हुई देरी के कारण आरोपी को फरार होने का मौका मिला, लेकिन अब पुलिस सभी पहलुओं से जांच कर रही है। उन्होंने भरोसा दिलाया कि आरोपी को जल्द गिरफ्तार किया जाएगा और जांच में जो भी दोषी पाया जाएगा, उसके खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
फिलहाल इस मामले में सबसे बड़ा सवाल यह बना हुआ है कि 245 शिकायतों के मुकाबले केवल 32 लाख रुपये का सेटलमेंट पर्याप्त कैसे माना जा सकता है। जब तक सभी शिकायतों का निष्पक्ष निराकरण नहीं होता और मुख्य आरोपी गिरफ्तार नहीं होता, तब तक प्रभावित खाताधारकों की लड़ाई जारी रहने की संभावना है।





