बिलासपुर। झीरम घाटी नक्सली घटना में नया जांच आयोग गठित किए जाने के खिलाफ भाजपा नेता धरमलाल कौशिक की जनहित याचिका पर छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट में सुनवाई दो सप्ताह के लिए टल गई है। मामले की सुनवाई चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा और जस्टिस रविंद्र अग्रवाल की खंडपीठ के समक्ष होनी थी, लेकिन चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा के सेवानिवृत्ति दिवस को देखते हुए खंडपीठ ने सुनवाई को आगे बढ़ा दिया।
नए जांच आयोग के खिलाफ लगाई गई थी जनहित याचिका
दरअसल, तत्कालीन भूपेश बघेल सरकार द्वारा झीरम घाटी घटना की जांच के लिए नया आयोग गठित किए जाने के खिलाफ तत्कालीन भाजपा प्रदेश अध्यक्ष धरमलाल कौशिक ने हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर की थी। कौशिक की ओर से मांग की गई थी कि नए जांच आयोग की कार्रवाई पर रोक लगाई जाए।
उनका तर्क था कि झीरम घाटी मामले की जांच पहले ही एक जांच आयोग कर चुका है, ऐसे में दोबारा जांच आयोग गठित करने की आवश्यकता नहीं है।
राज्य सरकार और प्रभावित परिवारों ने किया विरोध
वहीं राज्य सरकार और झीरम घाटी घटना से प्रभावित परिवारों की ओर से अधिवक्ता सुदीप श्रीवास्तव ने हस्तक्षेप याचिका दायर कर धरमलाल कौशिक की याचिका का विरोध किया था।
हस्तक्षेप याचिका में कहा गया कि जांच आयोग अधिनियम के तहत राज्य या केंद्र सरकार को जांच आयोग गठित करने का अधिकार है। यदि सरकार किसी आयोग की रिपोर्ट से संतुष्ट नहीं है, तो वह नया जांच आयोग गठित कर सकती है।
प्राथमिक सुनवाई के बाद लगा था स्टे
मामले की प्राथमिक सुनवाई के बाद धरमलाल कौशिक की याचिका के पक्ष में स्टे लगाया गया था। इसके चलते नया जांच आयोग अपना काम शुरू नहीं कर सका।
आज यह मामला चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा और जस्टिस रविंद्र अग्रवाल की खंडपीठ के समक्ष सुनवाई के लिए लगा था। हालांकि, चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा के सेवानिवृत्ति दिवस को देखते हुए खंडपीठ ने मामले की सुनवाई दो सप्ताह के लिए टाल दी है। अब इस मामले में अगली सुनवाई दो सप्ताह बाद होगी।





