September 4, 2026

कांकेर में वनाधिकार पट्टे की उम्मीद में जंगल की कटाई का आरोप, 500 से ज्यादा पेड़ काटे जाने की आशंका

भानुप्रतापपुर। कांकेर जिले के कोरर वन क्षेत्र में वनाधिकार पट्टा हासिल करने की कथित उम्मीद में बड़े पैमाने पर हरे-भरे और इमारती पेड़ों की कटाई का मामला सामने आया है। खड़का भुरका इलाके के कच्छ डोंगरी में ग्रामीणों ने जंगल के भीतर बड़ी संख्या में कटे हुए पेड़ देखे, जिसके बाद मामले ने तूल पकड़ लिया।

ग्रामीणों का आरोप है कि इलाके में 500 से अधिक हरे-भरे और इमारती पेड़ काटे गए हैं। जंगल की दुर्गम स्थिति के कारण मौके तक पहुंचने के लिए करीब दो किलोमीटर पैदल पहाड़ी रास्ता तय करना पड़ा। रास्ते में बरसाती नालों और कठिन रास्तों को पार करने के बाद जंगल के भीतर बड़े पैमाने पर पेड़ों की कटाई के निशान दिखाई दिए।

ग्रामीणों ने जंगल निरीक्षण के दौरान देखी कटाई

स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि वे समय-समय पर जंगल और वन संपदा की सुरक्षा के लिए इलाके का निरीक्षण करते हैं। इसी दौरान उन्हें बड़ी संख्या में पेड़ कटे हुए मिले। इसके बाद आसपास के क्षेत्रों में पड़ताल करने पर कटाई का दायरा और भी व्यापक नजर आया।

ग्रामीणों के अनुसार, यदि जांच में 500 से अधिक पेड़ों की कटाई की बात सही पाई जाती है, तो यह मामला केवल अवैध कटाई तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि वन विभाग की निगरानी और मैदानी अमले की कार्यप्रणाली पर भी सवाल खड़े होंगे।

वन विभाग की निगरानी पर उठे सवाल

ग्रामीणों का कहना है कि इतने बड़े स्तर पर पेड़ों की कटाई एक-दो दिन में संभव नहीं है। पेड़ों को काटने, जमीन से हटाने और जंगल के हिस्से को साफ करने में समय लगता है। ऐसे में सवाल उठ रहे हैं कि दुर्गम वन क्षेत्र में वन विभाग की नियमित गश्त और निगरानी कितनी प्रभावी रही।

कलेक्टर ने जांच की बात कही

मामले में कांकेर वन मंडलाधिकारी से संपर्क करने का प्रयास किया गया, लेकिन उनसे बातचीत नहीं हो सकी। वहीं, कांकेर कलेक्टर कुंदन कुमार ने मामले को गंभीरता से लेते हुए जांच कराने की बात कही है।

अब जांच के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि जंगल में कितने पेड़ों की कटाई हुई है, इसके पीछे कौन लोग जिम्मेदार हैं और क्या वनाधिकार पट्टा प्राप्त करने के उद्देश्य से कथित रूप से जंगल को साफ किया गया है।