March 4, 2026

कांकेर: सड़कों और पुलों के निर्माण से ग्रामीण विकास और समृद्धि को मिली नई दिशा

कांकेर। सड़कों और पुलों के निर्माण के बाद जिले में विकास और समृद्धि के रास्ते अब साफ नजर आने लगे हैं। सरकार ने दूरस्थ और अंदरूनी इलाकों को मुख्य मार्गों से जोड़ने को प्राथमिकता दी है और बड़े पैमाने पर सड़क एवं पुल-पुलियों के निर्माण को मंजूरी दी है। इससे पहले जहां आवागमन कठिन था, अब सालभर संपर्क बना हुआ है। ग्रामीणों की रोजमर्रा की जिंदगी आसान हुई है और विकास कार्यों को नई गति मिली है।

पिछले दो वर्षों में कांकेर जिले में 61 करोड़ 50 लाख रुपये की लागत से 15 पुल बन चुके हैं। इन पुलों से लगभग 100 गांवों और करीब 80 हजार लोगों का ब्लॉक, तहसील और जिला मुख्यालय से बारहमासी संपर्क सुनिश्चित हुआ है। ग्रामीणों को शिक्षा, स्वास्थ्य, व्यापार और पर्यटन जैसी सुविधाओं तक आसानी से पहुंच मिल रही है।
आतुरबेड़ा–भैसगांव–निन्ना मार्ग पर मेंढ़की नदी पर बने उच्च स्तरीय पुल ने सुदूरांचल के लोगों का आवागमन सुगम किया है और प्रशासनिक गतिविधियों को मजबूती प्रदान की है। सड़क और पुल नेटवर्क के विस्तार से माओवाद प्रभावित इलाकों में शासन की पकड़ भी मजबूत हुई है।

पिछले दो वर्षों में 85 करोड़ रुपये की लागत से 9 नए वृहद पुलों को स्वीकृति दी गई है। बासनवाही–टांहकापार मार्ग पर महानदी पर 28 करोड़ रुपये की लागत से स्वीकृत पुल ग्रामीणों और पर्यटन विकास के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है। सोनपुर–मरोड़ा मार्ग पर बेचाघाट में कोटरी नदी पर 15 करोड़ 50 लाख रुपये की लागत से पुल निर्माण प्रगति पर है, जो माड़ क्षेत्र के सीधे संपर्क को सुनिश्चित करेगा।

राज्य शासन सड़कों और पुलों के माध्यम से दूरस्थ अंचलों तक विकास की रोशनी पहुंचाने और ग्रामीणों की सहूलियत बढ़ाने के लिए प्रतिबद्ध है। कांकेर में बन रहे ये पुल केवल कांक्रीट की संरचनाएं नहीं हैं, बल्कि शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार और सुरक्षा के क्षेत्र में कदम बढ़ाने का माध्यम हैं। इनके पूरा होते ही जिले के सुदूरवर्ती गांवों को प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष लाभ मिलेगा और विकास की गति और तेज होगी।