कवर्धा। उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा के निर्देश पर कबीरधाम जिले के बोड़ला विकासखंड में खारिया से अगरी तक प्रधानमंत्री जनमन योजना के तहत बनी सड़क की राज्य स्तरीय जांच में गंभीर तकनीकी खामियां सामने आई हैं। जांच रिपोर्ट के आधार पर पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग ने निर्माण एजेंसी को ब्लैकलिस्ट करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। वहीं गुणवत्ता की निगरानी में लापरवाही बरतने पर सहायक अभियंता सौरभ देशमुख और उप अभियंता जे. रितेश नायडू को तत्काल प्रभाव से निलंबित करने के निर्देश दिए गए हैं। कार्यपालन अभियंता संतोष ठाकुर के निलंबन के लिए शासन को प्रस्ताव भेजा जाएगा।
पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग के सचिव भीम सिंह ने मौके पर पहुंचकर कोर कटिंग सहित तकनीकी जांच कराई। जांच में सामने आया कि सड़क धंसने का प्रमुख कारण 60 से 70 टन क्षमता वाले ओवरलोड वाहनों का आवागमन और सड़क के दोनों किनारों (शोल्डर) के निर्माण में तकनीकी खामी रही। सचिव ने क्षतिग्रस्त हिस्से को उखाड़कर दोबारा गुणवत्तापूर्ण निर्माण कराने, शोल्डर सुधारने तथा भविष्य में ओवरलोड वाहनों के आवागमन पर सख्ती से रोक लगाने के निर्देश दिए हैं।

चार महीने में ही धंस गई थी सड़क
बैगा आदिवासी बहुल क्षेत्रों को बेहतर सड़क सुविधा उपलब्ध कराने के उद्देश्य से प्रधानमंत्री जनमन योजना के तहत बोड़ला विकासखंड के मांदाभाटा से अगरी तक करीब 2.50 करोड़ रुपये की लागत से 3.50 किलोमीटर लंबी सड़क बनाई गई थी। यह सड़क ग्रामीणों के लिए शिक्षा, स्वास्थ्य, बाजार और आवागमन की सुविधा बढ़ाने के उद्देश्य से तैयार की गई थी, लेकिन निर्माण के महज चार महीने बाद पहली बारिश में ही सड़क का एक हिस्सा धंस गया।
वीडियो वायरल होने के बाद हरकत में आया प्रशासन
सड़क में वाहन का पहिया धंसने का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद शासन ने मामले को गंभीरता से लिया। इसके बाद रायपुर से पहुंचे विभागीय सचिव भीम सिंह ने मौके का निरीक्षण किया और निर्माण कार्य की गुणवत्ता पर नाराजगी जताते हुए संबंधित ठेकेदार को कड़ी फटकार लगाई।
जांच में सामने आईं तकनीकी खामियां
प्राथमिक जांच में सड़क की मुख्य परत को मानकों के अनुरूप पाया गया, लेकिन सड़क के दोनों किनारों (शोल्डर) का निर्माण गुणवत्ताहीन मिला। अधिकारियों के अनुसार सड़क 12 टन भार क्षमता के लिए बनाई गई थी, जबकि उस पर 60 टन तक रेत से लदे हाईवा वाहनों का संचालन हो रहा था। इसके बावजूद इतनी कम अवधि में सड़क का क्षतिग्रस्त होना गंभीर लापरवाही माना गया है।





