July 23, 2026

10 साल से गोदाम में धूल खा रहे 5,860 टिफिन, मनरेगा मजदूर आज भी योजना के लाभ से वंचित

खैरागढ़। सरकारी योजनाओं का लाभ समय पर जरूरतमंदों तक पहुंचाने के दावे करने वाले प्रशासन की कार्यशैली पर खैरागढ़ से एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है। मुख्यमंत्री मनरेगा मजदूर टिफिन वितरण योजना के तहत खरीदे गए 5,860 टिफिन बॉक्स पिछले करीब 10 वर्षों से जनपद पंचायत परिसर स्थित सरपंच सदन में धूल खा रहे हैं। जिन मनरेगा मजदूरों के लिए ये टिफिन खरीदे गए थे, वे आज भी योजना के लाभ का इंतजार कर रहे हैं।

जनपद पंचायत के रिकॉर्ड के अनुसार, वित्तीय वर्ष 2016-17 में ऐसे परिवारों को टिफिन बॉक्स वितरित किए जाने थे, जिनके किसी सदस्य ने मनरेगा के तहत 30 दिन या उससे अधिक रोजगार प्राप्त किया था। शासन ने खैरागढ़ जनपद पंचायत को कुल 15,220 टिफिन बॉक्स उपलब्ध कराए थे। इनमें से 9,360 टिफिन तो वितरित कर दिए गए, लेकिन 5,860 टिफिन आज तक गोदाम में ही पड़े हुए हैं। अब वित्तीय वर्ष 2026-27 चल रहा है, लेकिन करीब एक दशक बीत जाने के बाद भी हजारों पात्र हितग्राही योजना से वंचित हैं।

सरपंच सदन बना टिफिन का गोदाम

वर्षों से टिफिन बॉक्स सरपंच सदन में रखे होने के कारण पंचायत प्रतिनिधियों को भी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। सरपंचों के बैठने और पंचायत कार्यों के लिए बनाए गए इस भवन का उपयोग अब गोदाम की तरह हो रहा है। कई बार बैठकों के दौरान पर्याप्त जगह नहीं मिलने से प्रतिनिधियों को असुविधा होती है।

2018 में रुका वितरण, फिर फाइलों में दब गया मामला

जनपद पंचायत के रिकॉर्ड के मुताबिक, 2018 के विधानसभा चुनाव के दौरान लागू आदर्श आचार संहिता के कारण शेष टिफिन बॉक्स का वितरण रोक दिया गया था। इसके बाद कलेक्टर और जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी से मार्गदर्शन मांगा गया, लेकिन मामला फाइलों में ही उलझकर रह गया। न तो टिफिनों का वितरण हो सका और न ही उनके निस्तारण को लेकर कोई अंतिम फैसला लिया गया।

दो सरकारें बदलीं, लेकिन योजना अधूरी

इस दौरान प्रदेश में दो बार सरकार बदली। पहले भाजपा सरकार रही, फिर कांग्रेस की सरकार आई और उसका पूरा कार्यकाल समाप्त हो गया। वर्ष 2023 के अंत में भाजपा दोबारा सत्ता में लौटी, लेकिन इसके बावजूद करीब 5,860 टिफिन बॉक्स आज तक हितग्राहियों तक नहीं पहुंच सके।

सरपंच संघ ने उठाया मुद्दा

हाल ही में हुई सरपंच संघ की बैठक में भी यह मामला प्रमुखता से उठाया गया। सरपंचों ने मांग की कि या तो पात्र मनरेगा मजदूरों को तत्काल टिफिन बॉक्स वितरित किए जाएं या नियमानुसार उनका निस्तारण कर सरपंच सदन को खाली कराया जाए। उनका कहना है कि पंचायत प्रतिनिधियों के लिए बने भवन को वर्षों तक सरकारी सामान का गोदाम बनाकर रखना उचित नहीं है।

सीईओ बोले- रिकॉर्ड की जांच के बाद होगी कार्रवाई

जनपद पंचायत खैरागढ़ के मुख्य कार्यपालन अधिकारी हिमांशु गुप्ता ने कहा कि यह मामला उनके कार्यकाल से पहले का है। पूरे रिकॉर्ड की जांच और संबंधित अधिकारियों से जानकारी लेने के बाद ही विस्तृत जानकारी दी जा सकेगी।

करीब दस साल से लंबित इस मामले ने प्रशासनिक कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। अब जिला प्रशासन के सामने चुनौती केवल टिफिन बॉक्स का वितरण करने की नहीं, बल्कि यह तय करने की भी है कि गरीब मनरेगा मजदूरों के अधिकारों की अनदेखी के लिए आखिर जिम्मेदार कौन है।