खैरागढ़। खैरागढ़ शहर की जीवनरेखा मानी जाने वाली आमनेर नदी और उसकी सहायक नदियां मुस्का व पिपरिया आज बदहाली के दौर से गुजर रही हैं। सावन में बारिश के बावजूद नदी के कई हिस्सों में तल सूखा नजर आ रहा है। कहीं जलकुंभी और कचरा जमा है, तो कई जगह शहर की नालियों का गंदा पानी सीधे नदी में पहुंच रहा है।
नदी के प्रवाह क्षेत्र में अतिक्रमण और वर्षों से जमा मिट्टी व कचरे की परत ने नदी की गहराई और चौड़ाई दोनों को प्रभावित किया है। तीनों नदियों का संगम खैरागढ़ शहर में होता है, लेकिन लगातार बिगड़ती स्थिति के कारण इनका प्राकृतिक प्रवाह कमजोर पड़ता जा रहा है।
बारिश के बावजूद नहीं लौटा नदी का प्रवाह
इस साल जिले में लगातार बारिश हुई है, लेकिन पिछले दो वर्षों की तरह तेज बारिश नहीं हुई। जिला पंचायत CEO प्रेमकुमार पटेल के मुताबिक जिले में बारिश करीब 80 से 90 प्रतिशत के आसपास हुई है। ऊपरी क्षेत्रों के बांधों और खेतों में भी पर्याप्त पानी नहीं भर पाया है, जिसका असर नदियों के बहाव पर पड़ा है।
हालांकि, नदी की बदहाली के पीछे सिर्फ कम बारिश को जिम्मेदार नहीं माना जा सकता। लंबे समय से शहर की नालियों का पानी सीधे नदी में पहुंचना भी बड़ी समस्या है। CEO के मुताबिक नालियों के पानी को सोखपीट या उपचार व्यवस्था से गुजरना चाहिए, लेकिन कई जगह सीवेज सीधे नदी में पहुंच रहा है।
अतिक्रमण से सिकुड़ रहा नदी का रास्ता
नदी के घटते दायरे ने भी चिंता बढ़ा दी है। निर्मल त्रिवेणी अभियान से जुड़े भागवत शरण सिंह के मुताबिक वर्ष 2019 के बाद नदी का दायरा कम हुआ है। कई जगह नदी और नालों के प्रवाह क्षेत्र के भीतर तक निर्माण दिखाई दे रहा है।
नदी का रास्ता लगातार संकरा होने से सामान्य दिनों में पानी के ठहराव की क्षमता कम होती जाएगी। वहीं तेज बारिश के दौरान पानी के बहाव के लिए पर्याप्त जगह नहीं बचेगी। इससे भविष्य में खैरागढ़ में बाढ़ का खतरा भी बढ़ सकता है।
कभी नदी में नहाते थे लोग, अब गंदगी और जलकुंभी
स्थानीय निवासी मनोहर सेन बताते हैं कि जिस मुस्का नदी में कभी लोग नहाते-धोते थे, मवेशियों को पानी पिलाते थे और त्योहारों पर स्नान करते थे, आज सावन के मौसम में भी कई हिस्सों में पानी नजर नहीं आता।
वहीं स्थानीय निवासी विमल बोरकर के मुताबिक नदी में जलकुंभी और गंदगी जमा है। घरों से निकलने वाला मटमैला पानी भी सीधे नदी में पहुंच रहा है। स्थानीय लोगों ने नदी संरक्षण और अतिक्रमण हटाने की मांग की है।
नदी की बदहाली से भूजल रिचार्ज पर भी असर
आमनेर, मुस्का और पिपरिया नदियों की बदहाल स्थिति का असर सिर्फ पर्यावरण तक सीमित नहीं है। इसका सीधा प्रभाव क्षेत्र के भूजल स्तर और पेयजल व्यवस्था पर भी पड़ सकता है।
बारिश का पानी नदी और उसके आसपास के जलागम क्षेत्र में जितना अधिक समय तक रुकेगा, उतना ही बेहतर भूजल रिचार्ज होगा। लेकिन नदी का रास्ता सिकुड़ने, पानी के तेजी से निकल जाने और जल संरचनाओं की क्षमता कमजोर होने से प्राकृतिक रिचार्ज व्यवस्था प्रभावित हो रही है।
वर्ष 2022 में भी आमनेर-पिपरिया-मुस्का नदियों के सूखने और उसके भूजल व पेयजल संकट पर असर को लेकर रिपोर्ट सामने आई थी। इसके बावजूद समस्या का स्थायी समाधान अब तक नजर नहीं आ रहा है।
लमती योजना से नदी के प्रवाह को बढ़ाने की उम्मीद
जिला पंचायत CEO के मुताबिक आमनेर, मुस्का और पिपरिया नदियों के उद्गम क्षेत्रों में जल संरक्षण के काम कराने की तैयारी है। पिपरिया में एनीकट और पाइपलाइन से जुड़े कार्य प्रस्तावित हैं। भविष्य की लमती योजना से भी नदी के प्रवाह को बढ़ाने की उम्मीद जताई जा रही है।
शहर के गंदे पानी की समस्या के समाधान के लिए STP यानी सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट प्रस्तावित है। नगरपालिका स्तर पर इसके लिए जमीन का प्रस्ताव तैयार किया जा रहा है। STP बनने के बाद शहर के सीवेज को उपचारित कर नदी में जाने से पहले नियंत्रित किया जा सकेगा।
हालांकि बड़ा सवाल यह है कि STP बनने तक नदी में जा रहे गंदे पानी को कैसे रोका जाएगा और नदी के प्रवाह क्षेत्र में हो रहे अतिक्रमण पर कब कार्रवाई होगी।
सिर्फ सफाई नहीं, पूरी नदी के संरक्षण की जरूरत
आमनेर, मुस्का और पिपरिया नदियों को बचाने के लिए सिर्फ सफाई अभियान पर्याप्त नहीं होगा। उद्गम से संगम तक नदी का सर्वे, पुराने और वर्तमान प्रवाह क्षेत्र का सीमांकन, अतिक्रमण की पहचान, गाद और कचरे की सफाई तथा नालियों के सभी आउटलेट को नदी से अलग करने की जरूरत है।
नदी का संरक्षण सिर्फ पर्यावरण का मुद्दा नहीं है, बल्कि यह खैरागढ़ के भूजल, पेयजल और भविष्य की जल सुरक्षा से भी जुड़ा है। अगर समय रहते नदी का दायरा और प्राकृतिक प्रवाह नहीं बचाया गया, तो आने वाले समय में खैरागढ़ के सामने पानी की बड़ी चुनौती खड़ी हो सकती है।





