January 17, 2026

खैरागढ़ राजपरिवार–SIR विवाद: शिकायत से सुनवाई तक पूरा मामला समझिए

खैरागढ़ जिले में मतदाता सूची के स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) को लेकर उठा विवाद अब औपचारिक सुनवाई के चरण में पहुंच गया है। यह मामला खैरागढ़ राजपरिवार से जुड़ा होने के कारण राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों में चर्चा का विषय बना हुआ है।

विवाद की शुरुआत कैसे हुई?

30 दिसंबर 2025 को रानी विभा सिंह ने कलेक्टर खैरागढ़ को लिखित शिकायत दी। उन्होंने आरोप लगाया कि SIR प्रक्रिया के दौरान दिवंगत पूर्व विधायक एवं सांसद राजा देवव्रत सिंह की वैवाहिक स्थिति को लेकर गंभीर गलती की गई है।
शिकायत में कहा गया कि तलाकशुदा पूर्व पत्नी पद्मा सिंह को फिर से राजा देवव्रत सिंह की पत्नी के रूप में मतदाता सूची में दर्ज कर दिया गया, जबकि तलाक के बाद राजा देवव्रत सिंह का विवाह रानी विभा सिंह से हुआ था।

प्रशासन ने क्या कहा?

1 जनवरी 2026 को कलेक्टर कार्यालय ने प्रेस विज्ञप्ति जारी कर आरोपों को निराधार बताया। प्रशासन का कहना है कि SIR प्रक्रिया भारत निर्वाचन आयोग के दिशा-निर्देशों के अनुसार पूरी पारदर्शिता के साथ की जा रही है।
विज्ञप्ति के अनुसार 2003 और 2025 की मतदाता सूचियों का मिलान कर 23 दिसंबर 2025 को प्रारंभिक सूची प्रकाशित की गई थी। साथ ही दावा-आपत्ति दर्ज कराने की समय-सीमा 23 दिसंबर 2025 से 22 जनवरी 2026 तक तय है।

फिर नोटिस क्यों जारी हुआ?

प्रशासनिक खंडन के बावजूद 5 जनवरी 2026 को तहसीलदार छुईखदान ने नोटिस जारी कर दोनों पक्षों को 14 जनवरी 2026 को दस्तावेजों के साथ उपस्थित होने को कहा। इससे साफ हो गया कि मामला अब आपत्ति प्रक्रिया के तहत औपचारिक सुनवाई में प्रवेश कर चुका है।

आगे क्या?

14 जनवरी की सुनवाई में प्रस्तुत दस्तावेजों के आधार पर तय होगा कि यह केवल मतदाता सूची सुधार का मामला है या फिर SIR प्रक्रिया में वास्तव में कोई गंभीर चूक हुई है।