खैरागढ़ (छत्तीसगढ़)। जिले से एक गंभीर शैक्षणिक अनियमितता का मामला सामने आया है, जिसमें एक शासकीय शिक्षिका की पीएचडी प्रक्रिया पर सवाल खड़े हो गए हैं। आरोप है कि शिक्षिका ने एक ही समय में स्कूल और विश्वविद्यालय—दोनों जगह उपस्थिति दर्ज कराई और नियमों का उल्लंघन किया।
एक साथ दो जगह हाजिरी का आरोप
जानकारी के अनुसार, शासकीय हाईस्कूल लिमतरा में पदस्थ शिक्षिका निकेता सिंह ने इंदिरा कला संगीत विश्वविद्यालय से रेगुलर मोड में पीएचडी की। रेगुलर पीएचडी के नियमों के तहत नियमित उपस्थिति और शोध कार्य आवश्यक होता है।
लेकिन आरोप है कि 2011 से 2015 के बीच कई तारीखों पर शिक्षिका विश्वविद्यालय के सेमिनार, संगोष्ठी और शैक्षणिक गतिविधियों में मौजूद रहीं, जबकि उसी अवधि में स्कूल के उपस्थिति रजिस्टर में भी उनकी उपस्थिति दर्ज पाई गई।
मेडिकल लीव पर भी उठे सवाल
शिकायत में यह भी आरोप लगाया गया है कि शिक्षिका द्वारा ली गई मेडिकल छुट्टियों के दौरान भी वे पीएचडी से संबंधित गतिविधियों में सक्रिय रहीं, जिससे छुट्टियों के दुरुपयोग का संदेह गहराया है।
नियमों के उल्लंघन का आरोप
जिला पंचायत द्वारा जारी NOC में स्पष्ट शर्त थी कि अध्ययन के लिए अलग से अवकाश नहीं मिलेगा और केवल परीक्षा के दिन ही छुट्टी दी जाएगी। साथ ही यह भी कहा गया था कि स्कूल की पढ़ाई प्रभावित नहीं होनी चाहिए। शिकायत में दावा किया गया है कि इन शर्तों का पालन नहीं हुआ।
वेतन वृद्धि पर भी सवाल
पीएचडी के आधार पर मिली वेतन वृद्धि को लेकर भी सवाल उठाए गए हैं। शिकायतकर्ता का कहना है कि यदि डिग्री प्रक्रिया नियमों के विपरीत पाई जाती है तो इससे सरकारी वित्तीय नुकसान हुआ है, जिसकी वसूली होनी चाहिए।
जांच के आदेश जारी
मामले को गंभीर मानते हुए जिला शिक्षा अधिकारी (DEO), खैरागढ़-छुईखदान-गंडई ने जांच के आदेश जारी कर दिए हैं। प्राचार्य को जांच अधिकारी नियुक्त किया गया है और 15 दिनों के भीतर रिपोर्ट प्रस्तुत करने को कहा गया है।
अब पूरे मामले की जांच रिपोर्ट पर नजर टिकी है, क्योंकि अगर आरोप साबित होते हैं तो यह मामला शैक्षणिक नियमों के उल्लंघन का बड़ा उदाहरण बन सकता है और कड़ी कार्रवाई की संभावना है।






