खैरागढ़। शिक्षक पात्रता परीक्षा यानी TET की अनिवार्यता को लेकर खैरागढ़ में शिक्षकों का विरोध प्रदर्शन जारी है। शनिवार को शिक्षक साझा मंच के बैनर तले शिक्षकों ने बारिश के बीच धरना दिया और बाद में रैली निकालकर तहसीलदार को ज्ञापन सौंपा। प्रदर्शन कर रहे शिक्षकों ने TET से छूट समेत अपनी विभिन्न मांगों को लेकर सरकार से राहत देने की मांग की।
आखिर TET क्यों है जरूरी?
TET यानी Teacher Eligibility Test शिक्षक की न्यूनतम शिक्षण योग्यता को परखने वाली परीक्षा है। इसमें विषय ज्ञान के साथ बाल विकास, शिक्षण पद्धति, भाषा और बच्चों को समझने से जुड़े प्रश्न शामिल होते हैं। शिक्षा का अधिकार कानून लागू होने के बाद शिक्षक पात्रता के लिए TET को महत्वपूर्ण बनाया गया।
सुप्रीम कोर्ट ने भी इन-सर्विस शिक्षकों के लिए TET की अनिवार्यता को बरकरार रखा है। अदालत का तर्क है कि बच्चों की शिक्षा की गुणवत्ता से समझौता नहीं किया जा सकता।
20-30 साल पुराने शिक्षकों की क्या है परेशानी?
खैरागढ़ में प्रदर्शन कर रहे पुराने शिक्षकों का कहना है कि जब उनकी नियुक्ति हुई थी, उस समय TET अनिवार्य नहीं था। उन्होंने उस समय सरकार की ओर से निर्धारित सभी शैक्षणिक योग्यता और भर्ती की शर्तें पूरी की थीं। कई शिक्षक अब 20 से 30 साल तक सरकारी सेवा पूरी कर चुके हैं।
प्रधानपाठक ज्योति अग्रवाल ने कहा कि उनकी उम्र 58 वर्ष है। उनका कहना है कि इतने लंबे सेवाकाल के बाद अब TET की परीक्षा की शर्त उनके लिए परेशानी का कारण बन रही है। शिक्षकों का सवाल है कि जब विभाग ने उनकी योग्यता के आधार पर नियुक्ति की और वर्षों तक सेवा ली, तो अब बीच नौकरी में नई शर्त क्यों लागू की जा रही है।
शिक्षक साझा मंच के जिलाध्यक्ष रामलाल साहू ने कहा कि नियुक्ति के समय निर्धारित योग्यता पूरी करने के बाद ही शिक्षकों की भर्ती हुई थी। उनका सवाल है कि अगर शिक्षक 25-26 वर्षों से बच्चों को पढ़ा रहे हैं, तो इतने वर्षों तक उनकी योग्यता और शिक्षण क्षमता पर सवाल क्यों नहीं उठाया गया?
2028 तक TET पास करने का समय
सुप्रीम कोर्ट के फैसले के तहत पुराने शिक्षकों को राहत देते हुए TET पास करने के लिए 31 अगस्त 2028 तक का समय दिया गया है। यानी शिक्षकों की नौकरी तत्काल समाप्त होने की स्थिति नहीं है, लेकिन निर्धारित समय-सीमा के भीतर TET पास करना जरूरी होगा।
पदोन्नति के मामले में भी TET की शर्त महत्वपूर्ण है। यही वजह है कि पुराने शिक्षक अब सरकार से अपनी उम्र, लंबे अनुभव और सेवा अवधि को ध्यान में रखते हुए अलग व्यवस्था की मांग कर रहे हैं।
TET के अलावा ये भी हैं मांगें
शिक्षक साझा मंच ने TET से छूट के अलावा कई अन्य मांगें भी रखी हैं। इनमें प्रमुख रूप से:
- वरिष्ठता के आधार पर पदोन्नति।
- पूर्व सेवा अवधि को जोड़कर पूर्ण पेंशन का लाभ।
- केंद्रीय वेतनमान के आधार पर वेतन निर्धारण।
- वेतन विसंगतियों को दूर करना।
- B.Ed के लिए विभागीय ब्रिज कोर्स की व्यवस्था।
शिक्षकों का कहना है कि वे आंदोलन के कारण बच्चों की पढ़ाई प्रभावित नहीं करना चाहते। इसी वजह से शनिवार को स्कूल में पढ़ाने के बाद धरना और रैली का आयोजन किया गया। बारिश के बावजूद शिक्षक प्रदर्शन में डटे रहे और बाद में तहसीलदार को ज्ञापन सौंपा।
29 अगस्त से आंदोलन तेज करने की चेतावनी
शिक्षकों ने मांगों का समाधान नहीं होने पर आंदोलन को चरणबद्ध तरीके से तेज करने की चेतावनी दी है। शिक्षकों के मुताबिक 29 अगस्त को जिला स्तरीय हड़ताल की जाएगी। इसके बाद 5 सितंबर यानी शिक्षक दिवस तक सरकार के निर्णय का इंतजार किया जाएगा।
शिक्षकों ने कहा कि यदि इसके बाद भी मांगों पर कोई समाधान नहीं निकला तो 9 सितंबर से अनिश्चितकालीन आंदोलन शुरू किया जाएगा। साथ ही मुख्यमंत्री और शिक्षा मंत्री के निवास घेराव की भी चेतावनी दी गई है।
फिलहाल इस पूरे विवाद में एक ओर सुप्रीम कोर्ट का TET को लेकर फैसला है, वहीं दूसरी ओर पुराने शिक्षक अपनी लंबी सेवा और अनुभव के आधार पर राहत की मांग कर रहे हैं। अब सरकार के सामने चुनौती है कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश का पालन करते हुए पुराने शिक्षकों की व्यावहारिक परेशानियों का भी समाधान कैसे निकाला जाए।





