May 18, 2026

विश्व रंगमंच दिवस पर खैरागढ़ में दमदार प्रस्तुति: ‘महारथी’ और ‘नींद क्यों रात भर नहीं आती’ ने छुआ दिल

खैरागढ़। इन्दिरा सिंह कला संगीत विश्वविद्यालय में विश्व रंगमंच दिवस के अवसर पर ऐसा आयोजन हुआ, जिसने रंगमंच की असली ताकत को जीवंत कर दिया। कार्यक्रम में छात्रों ने दो अलग-अलग विषयों पर आधारित नाटकों की प्रस्तुति दी, जिसने दर्शकों को भावनात्मक और सामाजिक दोनों स्तर पर जोड़ दिया।

• विश्व रंगमंच दिवस पर विशेष आयोजन
विश्वविद्यालय, जो पहले भी राष्ट्रीय स्तर के रंगमंच आयोजनों की मेजबानी कर चुका है, ने इस खास मौके पर अपनी समृद्ध रंगमंच परंपरा को एक बार फिर साबित किया।

• ‘महारथी’ में कर्ण-कुंती का भावनात्मक द्वंद्व
भैरवी साहू, अंकित सिंह, हर्षगिरी भट्ट और आकांक्षी मेश्राम ने ‘महारथी’ के माध्यम से महाभारत के कर्ण और कुंती के बीच के संवेदनशील संवाद को जीवंत कर दिया, जिसने दर्शकों को भावुक कर दिया।

• दोस्ती और कर्तव्य के बीच कर्ण का संघर्ष
नाटक में कर्ण का आंतरिक द्वंद्व—मां के प्रति कर्तव्य और दोस्ती के प्रति निष्ठा—को बेहद प्रभावी तरीके से प्रस्तुत किया गया।

• ‘नींद क्यों रात भर नहीं आती’ ने दिखाया आधुनिक अकेलापन
दूसरे नाटक में डॉली अहिरवार, हर्षगिरी भट्ट, ध्रुव सिंह, दिशा चतुर्वेदी और यश बंसल ने सुरेन्द्र वर्मा की रचना को मंच पर उतारा, जिसमें एक युवती के अकेलेपन और मानसिक संघर्ष को दिखाया गया।

• हर संवाद में झलका समाज का सच
नाटक में युवती की बेचैनी, डर और खालीपन के जरिए आज के समाज की सच्चाई को दर्शाया गया, जिससे दर्शक खुद को जुड़ा हुआ महसूस कर सके।

• संगीत और मंच सज्जा ने बढ़ाया प्रभाव
प्रकाश, संगीत और मंच सज्जा ने दोनों प्रस्तुतियों को और भी प्रभावशाली बना दिया, जिससे पूरा माहौल जीवंत हो उठा।

• कुलपति और विभागाध्यक्ष ने की सराहना
कुलपति प्रो. लवली शर्मा ने कहा कि रंगमंच समाज को समझने का सशक्त माध्यम है, वहीं विभागाध्यक्ष प्रो. राजन यादव ने छात्रों की मेहनत और समर्पण की प्रशंसा की।

कुल मिलाकर, यह आयोजन केवल नाटक मंचन तक सीमित नहीं रहा, बल्कि दर्शकों के लिए एक गहरा अनुभव बन गया, जहां उन्होंने इतिहास की भावनाओं और वर्तमान की सच्चाई दोनों को करीब से महसूस किया।