May 13, 2026

Khelo India Tribal Games: ओलंपिक लक्ष्य पर नजर, कोमालिका बारी ने तेज की तैयारी

ट्राइबल गेम्स में कोमालिका बनीं आकर्षण
रायपुर। खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स में भारतीय स्टार तीरंदाज कोमालिका बारी इस बार प्रमुख आकर्षण बनी हुई हैं।

जूनियर से सीनियर तक चुनौतीपूर्ण सफर
विश्व कैडेट और जूनियर चैंपियन रह चुकी कोमालिका का सीनियर स्तर पर सफर आसान नहीं रहा, लेकिन वह लगातार टीम इंडिया में जगह बनाने की कोशिश कर रही हैं।

एशियन गेम्स और ओलंपिक पर फोकस
कोमालिका का लक्ष्य 2026 एशियाई खेल और 2028 ओलंपिक है, जिसके लिए वह पुणे में कड़ी ट्रेनिंग कर रही हैं।

मानसिक मजबूती पर खास ध्यान
उन्होंने कहा कि प्रदर्शन में मानसिक मजबूती की बड़ी भूमिका होती है, इसलिए वह तकनीक के साथ-साथ मानसिक तैयारी पर भी काम कर रही हैं।

12 साल की उम्र में शुरू किया सफर
कोमालिका ने 12 साल की उम्र में तीरंदाजी शुरू की थी। आर्थिक तंगी के कारण शुरुआती दिनों में उन्होंने बांस के धनुष से अभ्यास किया।

रोज 18 किमी साइकिल चलाकर पहुंचीं अकादमी
टाटा आर्चरी अकादमी में ट्रेनिंग के लिए उन्हें रोज 18 किलोमीटर साइकिल चलानी पड़ती थी, जो उनके संघर्ष को दर्शाता है।

ट्राइबल युवाओं को करना चाहती हैं प्रेरित
कोमालिका का कहना है कि वह चाहती हैं ज्यादा से ज्यादा जनजातीय युवा इस खेल को अपनाएं और आगे बढ़ें।

कई स्पर्धाओं में ले रहीं हिस्सा
रायपुर में आयोजित ट्राइबल गेम्स में वह व्यक्तिगत, टीम और मिश्रित टीम इवेंट में भाग ले रही हैं।

ट्राइबल गेम्स से बदलेगा खेल इकोसिस्टम
उन्होंने कहा कि यह मंच जनजातीय खिलाड़ियों को अवसर देने के साथ पूरे खेल तंत्र को बदलने की क्षमता रखता है।