July 23, 2026

कोलियारी तालाब उत्खनन विवाद: स्थगन आदेश के बावजूद जारी खुदाई, खनिज विभाग की भूमिका पर उठे सवाल

अभनपुर। ग्राम कोलियारी स्थित शीतला तालाब में चल रहे मिट्टी उत्खनन का मामला अब तूल पकड़ता जा रहा है। राजस्व विभाग के स्थगन आदेश के बावजूद कथित रूप से मशीनों और हाइवा वाहनों के जरिए उत्खनन और परिवहन जारी रहने के आरोप लगे हैं। वहीं, मौके पर पहुंचने के बाद भी खनिज विभाग द्वारा कोई ठोस कार्रवाई नहीं किए जाने से स्थानीय लोगों में नाराजगी बढ़ गई है।

जानकारों का कहना है कि किसी भी प्रकार के खनिज अथवा मिट्टी उत्खनन और उसके परिवहन के लिए निर्धारित नियमों, वैध अनुमति और रॉयल्टी संबंधी प्रावधानों का पालन अनिवार्य होता है। यदि संबंधित भूमि विवादित हो या उस पर स्थगन आदेश लागू हो, तो विभागीय कार्रवाई अपेक्षित होती है।

मौके पर मशीनें और हाइवा मिले, कार्रवाई नहीं

सूत्रों के अनुसार, रायपुर खनिज विभाग के निरीक्षक प्रवीण नेताम अपनी टीम के साथ निरीक्षण के लिए स्थल पर पहुंचे थे। इस दौरान वहां एक चैन माउंटेन मशीन और कई हाइवा वाहन कार्यरत पाए गए। हालांकि निरीक्षण के बाद टीम बिना किसी जब्ती या दंडात्मक कार्रवाई के वापस लौट गई।

इस घटनाक्रम के बाद स्थानीय लोगों के बीच यह सवाल उठने लगे हैं कि जब मौके पर उत्खनन गतिविधियां स्पष्ट रूप से दिखाई दे रही थीं, तो कार्रवाई क्यों नहीं की गई। लोगों का यह भी कहना है कि यदि दस्तावेजों की जांच की गई थी, तो उसके निष्कर्ष सार्वजनिक किए जाने चाहिए।

‘ग्रामीणों की सहमति’ वाले बयान पर विवाद

मीडिया से चर्चा में खनिज निरीक्षक प्रवीण नेताम ने कहा कि ग्रामीणों की सहमति से कार्य किया जा रहा है और फिलहाल संबंधित पक्ष को काम बंद करने की समझाइश दी गई है। उन्होंने बताया कि मौके पर एक मशीन और चार हाइवा वाहन मौजूद थे, लेकिन किसी भी वाहन की जब्ती नहीं की गई।

हालांकि इस बयान के बाद नया विवाद खड़ा हो गया है। स्थानीय लोगों और जानकारों का कहना है कि खनिज उत्खनन की वैधता का निर्धारण ग्रामीणों की सहमति से नहीं, बल्कि शासन के नियमों और विभागीय अनुमतियों के आधार पर होता है। ऐसे में केवल सहमति का हवाला देकर कार्रवाई से बचना कई सवाल खड़े करता है।

विभागीय निष्पक्षता पर उठ रहे सवाल

क्षेत्रवासियों का आरोप है कि सामान्य मामलों में बिना वैध दस्तावेजों के रेत, मुरूम या अन्य खनिजों का परिवहन करते पाए जाने पर विभाग तत्काल जब्ती और जुर्माने की कार्रवाई करता है। लेकिन इस मामले में स्थगन आदेश लागू होने के बावजूद मशीनें और वाहन संचालित होते रहे तथा विभागीय टीम कोई कार्रवाई किए बिना लौट गई।

इस वजह से विभाग की कार्यप्रणाली और निष्पक्षता को लेकर सवाल उठने लगे हैं। कुछ लोगों ने मामले में उच्चस्तरीय जांच की मांग भी की है।

निष्पक्ष जांच की मांग

शीतला तालाब उत्खनन विवाद अब प्रशासनिक और विभागीय जवाबदेही का विषय बनता जा रहा है। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि नियमों का उल्लंघन हुआ है, तो संबंधित पक्षों के साथ-साथ जिम्मेदार अधिकारियों की भूमिका की भी जांच होनी चाहिए।

फिलहाल पूरे मामले को लेकर जिला प्रशासन और खनिज विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों की ओर से किसी विस्तृत बयान का इंतजार है। क्षेत्रवासियों की मांग है कि मामले की निष्पक्ष जांच कर यह स्पष्ट किया जाए कि उत्खनन कार्य नियमों के तहत हो रहा था या नहीं, और यदि अनियमितता पाई जाती है तो दोषियों के खिलाफ कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।