बिलासपुर। हाईकोर्ट ने नाबालिग को शादी का झांसा देकर शारीरिक संबंध बनाने के आरोप में दर्ज POCSO मामले में आरोपी युवक को राहत देने से इनकार कर दिया है। चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा और जस्टिस रविंद्र कुमार अग्रवाल की डिवीजन बेंच ने स्पष्ट किया कि अपराध के समय शिकायतकर्ता नाबालिग थी, तो बाद में दोनों की शादी हो जाना और साथ रहना कथित POCSO अपराध को खत्म नहीं करता।
कोर्ट ने FIR, चार्जशीट और संज्ञान आदेश को रद्द करने की मांग वाली याचिका खारिज कर दी।
शादी का वादा कर संबंध बनाने का आरोप
मामला जांजगीर-चांपा जिले का है। आरोपी नवल किशोर आदित्य के खिलाफ महिला थाने में 22 अप्रैल 2026 को अपराध दर्ज किया गया था। शिकायत के अनुसार, पीड़िता वर्ष 2011 से आरोपी के संपर्क में थी। आरोप है कि आरोपी ने शादी का वादा कर उसके साथ शारीरिक संबंध बनाए और परिवार की वजह बताकर शादी टालता रहा।
बाद में दोनों ने 20 अप्रैल 2026 को शादी कर ली। पुलिस ने जांच पूरी करने के बाद 16 जून को चार्जशीट पेश की और 19 जून को विशेष POCSO अदालत ने मामले में संज्ञान लिया।
आरोपी ने FIR रद्द करने की मांग की
आरोपी की ओर से हाईकोर्ट में दलील दी गई कि दोनों लंबे समय से रिश्ते में थे और आखिरकार उन्होंने शादी कर ली है। शिकायतकर्ता ने भी मजिस्ट्रेट के सामने शिकायत को गलतफहमी का परिणाम बताते हुए आगे कार्रवाई नहीं चाहने की बात कही।
वहीं, राज्य सरकार की ओर से इसका विरोध किया गया। सरकार ने कहा कि संबंध की शुरुआत के समय पीड़िता नाबालिग थी, इसलिए बाद में हुआ विवाह या आपसी समझौता POCSO कानून के तहत बने अपराध को समाप्त नहीं कर सकता।
कोर्ट ने कहा- बाद की शादी से अपराध खत्म नहीं होता
हाईकोर्ट ने कहा कि मामले में प्रथम दृष्टया संज्ञेय अपराध बनता है। बाद में हुई शादी और दोनों का साथ रहना परिस्थितियों में प्रासंगिक हो सकता है, लेकिन इसके आधार पर शुरुआती स्तर पर आपराधिक कार्यवाही को खत्म नहीं किया जा सकता।
कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि BNSS की धारा 528 के तहत याचिका पर सुनवाई करते समय विवादित तथ्यों और साक्ष्यों का मूल्यांकन कर मिनी ट्रायल नहीं किया जा सकता।
इन परिस्थितियों को देखते हुए हाईकोर्ट ने नवल किशोर आदित्य की याचिका खारिज कर दी और FIR, चार्जशीट तथा संज्ञान आदेश को रद्द करने से इनकार कर दिया।
हाईकोर्ट के इस फैसले का केंद्रीय आधार यह है कि बाद की शादी और साथ रहने की कानूनी सीमा शुरुआती स्तर पर POCSO कार्यवाही खत्म करने के लिए पर्याप्त नहीं मानी गई





