रायपुर।
छत्तीसगढ़ विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष डॉ. चरणदास महंत इन दिनों न सिर्फ राजनीतिक विपक्ष बल्कि अपनी ही पार्टी और अपने ही क्षेत्र के नेताओं के निशाने पर आ गए हैं। अविभाजित मध्यप्रदेश कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष स्वर्गीय परस राम भारद्वाज के पुत्र संजय भारद्वाज ने सोशल मीडिया पर एक तीखा पोस्ट साझा किया है, जिसकी चर्चा रायपुर से लेकर प्रदेशभर की सियासत में तेज हो गई है।

फेसबुक पोस्ट से मचा सियासी बवाल
संजय भारद्वाज ने फेसबुक पर डॉ. महंत पर वंशवाद, सत्ता केंद्रित राजनीति और क्षेत्रीय उपेक्षा जैसे गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने लिखा कि नेता प्रतिपक्ष की राजनीति अब जनता की नहीं, बल्कि परिवार की सत्ता को बचाने और आगे बढ़ाने का प्रोजेक्ट बन चुकी है।
उन्होंने आरोप लगाया कि—
- पत्नी पहले से लोकसभा सांसद हैं,
- स्वयं राज्यसभा की राह पर हैं,
- और अब बेटे को विधायक बनाकर राजनीति में “लॉन्च” करने की तैयारी है।
संजय भारद्वाज ने इसे लोकतंत्र नहीं बल्कि वंशवाद की राजनीति करार दिया।
सक्ति विधानसभा को लेकर सवाल
पोस्ट में सक्ति विधानसभा क्षेत्र को लेकर भी तीखे सवाल उठाए गए हैं। संजय भारद्वाज ने लिखा कि क्षेत्र में—
- न कोई बड़ा उद्योग,
- न ठोस विकास कार्य,
- न ही शिक्षा और स्वास्थ्य में ठोस सुधार दिखाई देता है।
उनके मुताबिक क्षेत्र केवल पोस्टर, भाषण और पारिवारिक प्रचार तक सीमित रह गया है।
जांच एजेंसियों को लेकर भी उठाए सवाल
संजय भारद्वाज ने यह सवाल भी खड़ा किया कि जहां प्रदेश के अन्य नेताओं पर ईडी, एसीबी और सीबीआई जैसी एजेंसियों की कार्रवाई होती है, वहीं इस परिवार के आसपास कभी जांच क्यों नहीं होती। उन्होंने इसे “सिस्टम की चुप्पी” करार दिया।
कांग्रेस कार्यकर्ताओं के हक की बात
पोस्ट में कांग्रेस संगठन पर भी निशाना साधते हुए कहा गया कि—
“कार्यकर्ता जमीन पर मेहनत करें और राजनीति का फल केवल परिवार को मिले—यही आज की सच्चाई है।”
जनता से सवाल
संजय भारद्वाज ने अंत में जनता से सीधे सवाल करते हुए लिखा—
- क्या सक्ति विधानसभा सिर्फ एक राजनीतिक लॉन्चिंग पैड बन चुकी है?
- क्या छत्तीसगढ़ कुछ गिने-चुने लोगों की जागीर बनता जा रहा है?
उन्होंने जनता से अपील की कि ऐसी राजनीति का जवाब वोट के जरिए दिया जाना चाहिए।
महंत की ओर से प्रतिक्रिया नहीं
फिलहाल इस वायरल पोस्ट पर नेता प्रतिपक्ष डॉ. चरणदास महंत की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। लेकिन कांग्रेस के भीतर उठे इस सार्वजनिक विरोध को आगामी राजनीतिक घटनाक्रम के लिहाज से अहम माना जा रहा है।




