लोरमी। बीती रात आए भीषण आंधी-तूफान के चलते लोरमी के 50 बिस्तर वाले मातृ-शिशु अस्पताल में बिजली व्यवस्था ठप हो गई, जिसके कारण एक महिला की डिलीवरी मोबाइल टॉर्च की रोशनी में करानी पड़ी। इस घटना ने स्वास्थ्य व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए थे, जिसके बाद मामला सामने आते ही अस्पताल प्रबंधन हरकत में आ गया और तत्काल सुधार कार्य शुरू किया गया।
मामले के उजागर होने के बाद अस्पताल प्रशासन ने तकनीकी खामियों को दूर करते हुए बिजली आपूर्ति बहाल कर दी है। अब अस्पताल में विद्युत व्यवस्था सामान्य रूप से संचालित हो रही है और बैकअप सिस्टम भी पूरी तरह दुरुस्त कर दिया गया है।
आंधी-तूफान से बिगड़ी व्यवस्था
खंड चिकित्सा अधिकारी जीएस दाऊ के अनुसार, तेज आंधी और खराब मौसम के कारण अस्पताल के इनवर्टर और जनरेटर सिस्टम में शॉर्ट सर्किट हो गया था, जिससे बिजली आपूर्ति बाधित हो गई। इस तकनीकी खराबी के चलते अस्पताल के कुछ हिस्सों में अचानक अंधेरा छा गया।
टॉर्च की रोशनी में कराई गई डिलीवरी
बिजली गुल होने के दौरान ही एक गर्भवती महिला को प्रसव पीड़ा शुरू हो गई, जिसके बाद डॉक्टरों और स्टाफ ने मोबाइल टॉर्च की रोशनी में ही सुरक्षित डिलीवरी कराई। राहत की बात यह रही कि मां और नवजात दोनों पूरी तरह स्वस्थ हैं।
तुरंत किया गया सुधार कार्य
घटना की गंभीरता को देखते हुए अस्पताल प्रबंधन ने तुरंत मरम्मत कार्य कराया। शॉर्ट सर्किट की समस्या को दूर कर इनवर्टर और जनरेटर को फिर से चालू किया गया। अब अस्पताल में बिजली की आपूर्ति सुचारू रूप से हो रही है।
स्वास्थ्य व्यवस्था पर उठे सवाल
इस घटना ने ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य सुविधाओं और आपातकालीन व्यवस्थाओं की स्थिति पर सवाल खड़े कर दिए हैं। हालांकि, प्रशासन की त्वरित कार्रवाई से स्थिति को नियंत्रित कर लिया गया है, लेकिन भविष्य में ऐसी घटनाओं से बचने के लिए मजबूत बैकअप सिस्टम की आवश्यकता महसूस की जा रही है।
कुल मिलाकर, एक गंभीर लापरवाही के बाद सिस्टम में सुधार जरूर हुआ है, लेकिन यह घटना स्वास्थ्य सेवाओं की वास्तविक स्थिति को भी उजागर करती है।





