July 23, 2026

महादेव ऐप का मास्टरमाइंड सौरभ चंद्राकर ओमान में गिरफ्तार, फर्जी इंडोनेशियाई पासपोर्ट से एंट्री का आरोप

रायपुर।

महादेव ऑनलाइन सट्टा ऐप के प्रमुख संचालक सौरभ चंद्राकर को फर्जी इंडोनेशियाई पासपोर्ट के जरिए ओमान में प्रवेश करने के आरोप में रॉयल ओमान पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, यह कार्रवाई भारतीय एजेंसियों द्वारा जारी इंटरपोल के रेड नोटिस के आधार पर की गई। गिरफ्तारी के बाद भारत सरकार अब सौरभ चंद्राकर के प्रत्यर्पण की प्रक्रिया तेज करने में जुट गई है।

बताया जा रहा है कि सौरभ चंद्राकर पिछले कुछ समय से संयुक्त अरब अमीरात (UAE) में रह रहा था। गिरफ्तारी के बाद उसे मस्कट स्थित हाई-सिक्योरिटी अल खौद डिटेंशन सेंटर में रखा गया है। उसके खिलाफ फर्जी पासपोर्ट के इस्तेमाल और अवैध तरीके से ओमान में प्रवेश करने का मामला दर्ज किया गया है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, उसने अपनी कानूनी पैरवी के लिए मस्कट में वकीलों की एक टीम भी नियुक्त की है।

सौरभ चंद्राकर महादेव ऑनलाइन सट्टा ऐप घोटाले के मुख्य आरोपियों में शामिल है। इस मामले की जांच प्रवर्तन निदेशालय (ED) और केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) कर रहे हैं। जांच एजेंसियां हजारों करोड़ रुपये के अवैध ऑनलाइन सट्टेबाजी, मनी लॉन्ड्रिंग और संदिग्ध वित्तीय लेन-देन की जांच में जुटी हैं।

हाल ही में इंटरपोल की Commission for the Control of INTERPOL’s Files (CCF) ने सौरभ चंद्राकर की उस याचिका को खारिज कर दिया था, जिसमें उसने अपने खिलाफ जारी रेड नोटिस हटाने की मांग की थी। चंद्राकर का दावा था कि भारत में उसके खिलाफ राजनीतिक कारणों से मामला दर्ज किया गया है और उसे निष्पक्ष सुनवाई नहीं मिलेगी। हालांकि, CCF ने स्पष्ट किया कि मामला वित्तीय अपराध और मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़ा है, न कि राजनीतिक उत्पीड़न से, इसलिए रेड नोटिस जारी रहेगा।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, CCF में सुनवाई के दौरान ही सौरभ चंद्राकर UAE छोड़कर ओमान पहुंच गया था। जांच एजेंसियों का मानना है कि फर्जी पासपोर्ट के जरिए ओमान में प्रवेश करना उसकी सोची-समझी रणनीति हो सकती है, ताकि भारत की प्रत्यर्पण प्रक्रिया में देरी हो। ओमान के कानून के तहत फर्जी पासपोर्ट का इस्तेमाल गंभीर अपराध माना जाता है, जिसमें 3 से 5 वर्ष तक की सजा और जुर्माने का प्रावधान है।

गौरतलब है कि वर्ष 2019 से फरार चल रहे सौरभ चंद्राकर को भारत लाने के लिए पहले भी कई प्रयास किए जा चुके हैं। वर्ष 2024 में दुबई में उसे इंटरपोल रेड नोटिस के आधार पर हिरासत में लिया गया था और कुछ समय तक हाउस अरेस्ट में भी रखा गया, लेकिन बाद में उसे रिहा कर दिया गया था। भारत ने उसके प्रत्यर्पण का अनुरोध भी भेजा था, जिस पर उस समय अमल नहीं हो सका। अब ओमान में गिरफ्तारी के बाद उसके भारत प्रत्यर्पण की संभावना एक बार फिर बढ़ गई है।