रायपुर। महादेव ऑनलाइन बेटिंग ऐप मामले के प्रमुख आरोपी सौरभ चंद्राकर की ओमान में गिरफ्तारी के बाद जांच में बड़ा खुलासा हुआ है। सोशल मीडिया पर एक कथित फर्जी पासपोर्ट सामने आया है, जिसमें तस्वीर सौरभ चंद्राकर की बताई जा रही है, जबकि नाम श्रीलंकाई क्रिकेटर अजंता मेंडिस का दर्ज है। जांच एजेंसियां इस दस्तावेज की जांच कर रही हैं और आशंका जताई जा रही है कि इसका इस्तेमाल प्रत्यर्पण प्रक्रिया से बचने के लिए किया गया हो सकता है।
फर्जी पासपोर्ट से ओमान में प्रवेश की आशंका
जांच एजेंसियों के अनुसार, सौरभ चंद्राकर ने कथित रूप से फर्जी पासपोर्ट के जरिए ओमान में प्रवेश किया। वायरल दस्तावेज में पासपोर्ट संख्या E3387986 दर्ज है, जिसमें धारक को दक्षिण-पूर्व एशियाई नागरिक बताया गया है। दस्तावेज के अनुसार यह पासपोर्ट 21 जून 2024 को जारी हुआ और 21 जून 2034 तक वैध दर्शाया गया है।

अलग-अलग दस्तावेजों में अलग पहचान
जांच में यह भी सामने आया है कि सौरभ चंद्राकर और उसके सहयोगी रवि उप्पल ने पहले वानूआतू की नागरिकता हासिल की थी। उस दस्तावेज में सौरभ की जन्मतिथि 13 जनवरी 1995 दर्ज है, जबकि कथित फर्जी पासपोर्ट में जन्मतिथि 11 मार्च 1998 दिखाई गई है। अलग-अलग दस्तावेजों में अलग पहचान और जन्मतिथि मिलने के बाद एजेंसियां इसकी जांच कर रही हैं।
रेड नोटिस हटाने की याचिका हुई थी खारिज
महादेव ऑनलाइन बेटिंग ऐप मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) और CBI अवैध ऑनलाइन सट्टेबाजी, मनी लॉन्ड्रिंग और वित्तीय लेन-देन की जांच कर रही हैं। हाल ही में इंटरपोल की Commission for the Control of INTERPOL’s Files (CCF) ने सौरभ चंद्राकर की रेड नोटिस हटाने की याचिका खारिज कर दी थी।
सौरभ ने दावा किया था कि भारत में उसके खिलाफ दर्ज मामला राजनीतिक कारणों से प्रेरित है, लेकिन CCF ने इसे वित्तीय अपराध और मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़ा मामला मानते हुए रेड नोटिस को बरकरार रखा।
फर्जी पासपोर्ट के इस्तेमाल की जांच जारी
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, सौरभ चंद्राकर CCF में सुनवाई के दौरान UAE छोड़कर ओमान पहुंच गया था। जांच एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि कथित फर्जी पासपोर्ट किस नेटवर्क के माध्यम से तैयार किया गया और क्या इसका इस्तेमाल भारत प्रत्यर्पण प्रक्रिया में देरी करने के उद्देश्य से किया गया था।
नोट: वायरल पासपोर्ट और उसमें दर्ज पहचान की जांच संबंधित एजेंसियों द्वारा की जा रही है। दस्तावेजों की प्रामाणिकता और आरोपों की अंतिम पुष्टि जांच पूरी होने के बाद ही होगी।





