May 13, 2026

महासमुंद में 1.5 करोड़ का LPG घोटाला: गैस कालाबाजारी में प्लांट मैनेजर, खाद्य अधिकारी और एजेंसी संचालक हिरासत में

महासमुंद। जिले में करीब 1.5 करोड़ रुपए से अधिक के एलपीजी घोटाले का बड़ा मामला सामने आया है। पुलिस की जांच में गैस कालाबाजारी और रिकॉर्ड में भारी गड़बड़ी का खुलासा हुआ है। इस मामले में प्लांट मैनेजर, खाद्य विभाग के अधिकारी और गैस एजेंसी संचालक सहित कई लोगों को हिरासत में लिया गया है।

गैस कालाबाजारी का बड़ा खेल उजागर

जांच में सामने आया है कि मार्च के अंतिम सप्ताह से लेकर 6 अप्रैल 2026 के बीच सुनियोजित तरीके से एलपीजी की अवैध निकासी की गई। आरोप है कि प्लांट मैनेजर, खाद्य अधिकारी और सहायक खाद्य अधिकारी ने गौरव गैस एजेंसी के संचालक के साथ मिलकर इस पूरे नेटवर्क को संचालित किया।

6 कैप्सूल से 90 मीट्रिक टन गैस गायब

पुलिस जांच के अनुसार 6 गैस कैप्सूल वाहनों से लगभग 90 मीट्रिक टन एलपीजी अवैध रूप से खाली की गई। GPS ट्रैकिंग सिस्टम की जांच में यह सामने आया कि अलग-अलग तारीखों में गैस कैप्सूल से चोरी की गई गैस को बाजार में खपाया गया।

GPS डेटा से खुला पूरा घोटाला

कैप्सूल वाहनों में लगे GPS सिस्टम की जांच में कई अहम तथ्य सामने आए। 31 मार्च, 1 अप्रैल, 3 अप्रैल और 5 अप्रैल को अलग-अलग कैप्सूल से गैस निकासी की पुष्टि हुई। इसी डेटा के आधार पर पूरे घोटाले का क्रमवार खुलासा हुआ।

रिकॉर्ड में भी भारी गड़बड़ी

दस्तावेजों की जांच में पाया गया कि अप्रैल माह में केवल 47 टन गैस की खरीद दर्ज थी, जबकि 107 टन से अधिक की बिक्री दिखाई गई। शुरुआती स्टॉक शून्य होने के बावजूद अतिरिक्त बिक्री दर्ज होना गंभीर अनियमितता को दर्शाता है।

कर्मचारियों के बयान से हुआ खुलासा

प्लांट कर्मचारियों ने पूछताछ में बताया कि यह पूरा काम उच्च अधिकारियों के निर्देश पर किया गया था। गैस को पहले बुलेट टैंक में डंप किया जाता था और फिर निजी टैंकरों के जरिए अलग-अलग स्थानों पर भेजा जाता था।

चार लोग हिरासत में, दो फरार

मामले में प्लांट मैनेजर, खाद्य अधिकारी, सहायक खाद्य अधिकारी और गौरव गैस एजेंसी के संचालक को हिरासत में लिया गया है। वहीं ठाकुर पेट्रोकेमिकल के दो मालिक फरार बताए जा रहे हैं, जिनकी तलाश जारी है।

जांच जारी, और खुलासों की संभावना

पुलिस का कहना है कि मामले की जांच अभी जारी है और आने वाले दिनों में और भी बड़े खुलासे हो सकते हैं। यह घोटाला प्रशासनिक और सप्लाई सिस्टम में गंभीर खामियों की ओर इशारा करता है।