
Mahasamund News Today: महासमुंद जिले में कक्षा चौथी की अर्धवार्षिक परीक्षा में पूछे गए विवादास्पद प्रश्न को लेकर बड़ा प्रशासनिक एक्शन सामने आया है। लोक शिक्षण संचालनालय ने जांच के बाद जिला शिक्षा अधिकारी (डीईओ) विजय कुमार लहरे को पूर्णत: दोषी पाया है। संचालनालय ने माना कि प्रश्नपत्र उनके द्वारा स्वीकृत प्रति के अनुरूप नहीं था, इसके बावजूद परीक्षा से पहले सुधार के लिए कोई कार्रवाई नहीं की गई।
📌 क्या है पूरा मामला?
महासमुंद जिले में कक्षा 4 की हिन्दी अर्धवार्षिक परीक्षा में एक सवाल पूछा गया था—
“मोना के कुत्ते का क्या नाम है?”
इस प्रश्न के विकल्पों में ‘राम’ नाम भी शामिल था। इस पर विश्व हिंदू परिषद ने कड़ी आपत्ति जताई और इसे धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने वाला बताया। विरोध के दौरान डीईओ का पुतला दहन किया गया और कलेक्टर को ज्ञापन सौंपकर 7 दिन के भीतर कार्रवाई की मांग की गई।
📝 लोक शिक्षण संचालनालय ने क्यों माना डीईओ को दोषी?
मामले को गंभीरता से लेते हुए लोक शिक्षण संचालनालय ने डीईओ को कारण बताओ नोटिस जारी किया था। नोटिस में पूछा गया था कि—
- क्या यह स्पष्ट नहीं हुआ कि प्रश्नपत्र, डीईओ द्वारा दी गई मूल प्रति के अनुरूप मुद्रित नहीं है?
- क्या परीक्षा से पहले प्रश्नपत्रों की तुलना अन्य विषयों से नहीं की गई?
जवाब में डीईओ ने बताया कि परीक्षा तिथियों में दो बार बदलाव के कारण मुद्रण से प्राप्त सीलबंद प्रश्नपत्रों से ही परीक्षा आयोजित करनी पड़ी।
हालांकि संचालनालय ने यह तर्क स्वीकार नहीं किया और कहा कि—
“यह स्पष्ट था कि प्रश्नपत्र मूल प्रति के अनुरूप नहीं था, इसके बावजूद सुधार के लिए कोई कार्रवाई नहीं की गई।”
इसी आधार पर डीईओ को पूर्णत: दोषी माना गया।
⚠️ धार्मिक संगठनों का विरोध और चेतावनी
इस सवाल को लेकर जिले में माहौल तनावपूर्ण हो गया था। विश्व हिंदू परिषद ने इसे सनातन आस्था से जुड़ा मामला बताते हुए आंदोलन की चेतावनी दी थी। संगठन ने कहा था कि यदि समय रहते कार्रवाई नहीं हुई, तो आंदोलन और उग्र होगा।
🎙️ डीईओ पहले ही जता चुके हैं खेद
जांच रिपोर्ट सामने आने से पहले ही डीईओ विजय कुमार लहरे ने मीडिया से चर्चा में इस पूरे प्रकरण पर खेद व्यक्त किया था। उन्होंने कहा था—
- भविष्य में ऐसी त्रुटि दोबारा नहीं होगी
- प्रश्नपत्र निर्माण और मुद्रण प्रक्रिया को और सख्त किया जाएगा
- आवश्यक सावधानियां अपनाई जाएंगी
⚖️ शिक्षा व्यवस्था पर उठे सवाल
इस घटना ने प्रश्नपत्र निर्माण, मॉनिटरिंग और जवाबदेही पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। प्राथमिक कक्षाओं में इस तरह की लापरवाही को लेकर अभिभावकों और शिक्षाविदों में भी नाराजगी देखी जा रही है।





