May 13, 2026

महासमुंद में अवैध प्लाटिंग पर बड़ी कार्रवाई, रमनटोला की कृषि भूमि के पंजीयन पर रोक

महासमुंद। शहर के रमनटोला क्षेत्र में कृषि भूमि की अवैध प्लाटिंग का मामला सामने आने के बाद प्रशासन ने सख्त रुख अपनाया है। जांच में अनियमितता पाए जाने के बाद अनुविभागीय अधिकारी राजस्व (एसडीएम) अक्षा गुप्ता ने उप पंजीयक कार्यालय को संबंधित भूमि के विक्रय पंजीयन पर तत्काल प्रभाव से रोक लगाने के निर्देश जारी किए हैं।

एसडीएम द्वारा जारी आदेश में स्पष्ट कहा गया है कि निवेश सीमा क्षेत्र के भीतर स्थित कृषि भूमि को छोटे-छोटे प्लॉटों में विभाजित कर बेचना नियमों के विरुद्ध है। ऐसे मामलों में बिना उचित जांच और वैधानिक प्रक्रिया के किसी भी प्रकार का पंजीयन नहीं किया जाएगा।

जांच के दौरान हल्का नंबर 42 अंतर्गत खसरा नंबर 1800/9, 1800/10 और 1800/38 की भूमि में अनियमितता सामने आई। कुल लगभग 1.32 हेक्टेयर कृषि भूमि को कथित रूप से बिना अनुमति के 22 छोटे प्लॉटों में विभाजित कर बिक्री किए जाने की बात जांच रिपोर्ट में दर्ज की गई है। यह भूमि चेतना मालू पति संजय मालू जैन के नाम पर राजस्व अभिलेखों में दर्ज है।

प्रशासनिक अधिकारियों के अनुसार यह भूमि निवेश क्षेत्र में आती है, जहां किसी भी प्रकार की प्लाटिंग से पहले नगर तथा ग्राम निवेश विभाग की अनुमति और भूमि डायवर्सन अनिवार्य होता है। बिना वैधानिक स्वीकृति के प्लॉटिंग को अवैध माना जाता है।

एसडीएम ने उप पंजीयक कार्यालय को निर्देशित किया है कि जब तक पूर्ण जांच और कानूनी प्रक्रिया पूरी नहीं होती, तब तक उक्त खसरों की भूमि का कोई भी पंजीयन न किया जाए। आदेश की प्रतिलिपि कलेक्टर, तहसीलदार, नगरपालिका और संबंधित राजस्व अमले को भी भेजी गई है।

इस कार्रवाई को रियल एस्टेट क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि अवैध प्लाटिंग से न केवल शासन को राजस्व का नुकसान होता है, बल्कि आम नागरिक भी भविष्य में कानूनी विवादों में फंस जाते हैं।

प्रशासन ने आम नागरिकों से अपील की है कि भूमि खरीदने से पहले उसकी वैधता, खसरा स्थिति और स्वीकृति दस्तावेजों की जांच अवश्य करें, ताकि किसी भी प्रकार की धोखाधड़ी और कानूनी परेशानी से बचा जा सके।